About us

In an era when TV has been absorbed into the smart phone and mobile has become a puppet of hands. Without knowing the truth, many times fast rumors fly in social media, every moment of leisure is spent in reading and watching news in mobile. The launch of ‘thepubliceye.in’ is not a new thing as another major change in the field of information revolution is set to knock through ‘5G’.

The only thing is that some hardcore journalists were trying to make their own platform where they can tell the truth, may express their views, some analysis, satire and some outrage. Where there is no unnecessary restraint. We promise that you will not find news of cut-copy-paste.

From making ‘thepubliceye.in’ to operating, only the experience-sweat of pure journalists has taken place. There is no master and no servant, only professionalism. Now this is your platform, use it to the fullest and give yourself a sense of belonging. Join us in a meaningful step taken with a positive thought. The journey is long so you too come and keep calling others…

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एक ऐसे दौर में टीवी जब पहले ही स्मार्टफोन में समा गया हो और मोबाइल हाथों की कठपुतली बन गया हो. सच को जाने-समझे बिना सोशल मीडिया में कई गुना तेज अफवाहें उड़ान भरती हों, फुर्सत का हर लम्हा मोबाइल में खबरें पढ़ने-देखने में गुजर रहा हो. फारवर्ड, शेयर, लाइक जैसे शब्द जिन्दगी का हिस्सा बन गये हों. ‘5जी’ के जरिए सूचना क्रान्ति के क्षेत्र में एक और बहुत बड़ा बदलाव दस्तक देने की तैयारी में हो, ऐसे में ‘द पब्लिक आई डॉट इन’ का आना कोई नई बात नहीं है.

बात सिर्फ इतनी है कि लम्बे समय से पत्रकारिता से जुड़े कुछ चेहरे, जो विशुद्ध पत्रकार हैं, वह कट-कॉपी-पेस्ट की खबरों से इतर अपनी बात कहने का अपना मंच बनाना चाह रहे थे. जिसमें अपनी पूरी जिम्मेदारी और जवाबदेही के साथ वह कुछ कह-बोल सकें.जिसमें हमारी-आपकी बात हो, कुछ सीखने को मिल सके, कुछ बताने का अवसर हो, कुछ विश्लेषण, व्यंग और कुछ बेबाकीपन हो. जहां बेकार की रोक-टोक न हो, एक परिंदे की तरह उड़ान भरने की आजादी हो.

ऐसे लोगों ने ‘द पब्लिक आई डॉट इन’ को आपके सामने प्रस्तुत किया है.इसे बनाने से लेकर संचालित करने में विशुद्ध पत्रकारों का ही अनुभव-पसीना लगा है.इसमें न कोई स्वामी है और न कोई नौकर.व्यवसायिकता के इस दौर में सभी को मिलकर ही इसे सींचना है. अब ये आप सबका मंच है, इसे भरपूर इस्तेमाल कीजिए, अपनापन दीजिए. एक सकारात्मक सोच के साथ उठाए सार्थक कदम में हमारे साथ हो लीजिए.सफर लम्बा है, इसलिए आप भी आईए, और को भी बुलाते रहिए…