Homeराज्यमायावती ने मुख्तार का टिकट काटा तो एआईएमआईएम ने कहा-'हम बनायेंगे विधायक'

मायावती ने मुख्तार का टिकट काटा तो एआईएमआईएम ने कहा-‘हम बनायेंगे विधायक’

लखनऊ। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती पर मुसलमानों को इस्तेमाल कर छोड़ने की सियासत का आरोप लगाया है। इसके साथ ही पार्टी ने मुख्तार अंसारी को टिकट देने की पेशकश की है। मायावती ने आज ही आजमगढ़ मण्डल की मऊ विधानसभा सीट से मुख्तार अंसारी के बजाय बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर को उम्मीदवार बनाने का निर्णय किया है।

एआईएमआईएम के प्रवक्ता असीम वकार ने शुक्रवार को कहा कि बसपा सुप्रीमो ‘यूज एण्ड थ्रो’ की राजनीति करती है, उन्होंने मुख्तार अंसारी का टिकट काट कर किसी और को दे दिया है। अगर मुख्तार अंसारी साहब चुनाव लड़ना चाहे तो हमारे दरवाजे उनके लिए खुले हैं।

असीम वकार ने कहा कि ये लोग आपको जीतने नहीं देगे। आपके रुपये भी लेंगे और आपको हरायेंगे भी। क्योंकि इनकी कम्युनिटी का वोट आपकी तरफ ट्रांसफर नहीं होता है। उन्होंने कहा कि वहीं दूसरी ओर हम लोग टिकट भी देंगे और वोट भी दिलाएंगे और आपको विधायक भी बनाएंगे।

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उन्होंने कहा कि ये वक्त फासिस्ट ताकतों को मुंह तोड़ जवाब देने का है। ये आपको इस्तेमाल कर मक्खी की तरह छोड़ देंगे। असीम वकार ने कहा कि एआईएमआईएम के दरवाजे सबके लिए खुले हैं। जिन मुसलमानों को टिकट चाहिए, हमारे पास आईए, हम उन्हें टिकट देंगे।

2002 से मऊ सदर सीट रही मुख्तार का अभेद सियासी गढ़

वर्तमान में बांदा जेल में बन्द मुख्तार अंसारी मऊ सदर सीट से विधायक हैं। मऊ सदर विधानसभा क्षेत्र मुख्तार अंसारी का मजबूत गढ़ है। मुख्तार अंसारी साल 2002 से मऊ सदर विधानसभा क्षेत्र का विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वे लगातार चार बार से मऊ सदर सीट से विधायक हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में मुख्तार अंसारी को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के उम्मीदवार महेंद्र राजभर ने कड़ी टक्कर दी थी। कड़े मुकाबले में मुख्तार अंसारी ने महेन्द्र राजभर को 8698 वोट के अंतर से हरा दिया था। पिछले चुनाव में मुख्तार अंसारी अपनी पार्टी कौमी एकता दल का बसपा में विलय कर हाथी निशान पर चुनाव मैदान में उतरे थे। इससे पहले बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी साल 2012 में बसपा के भीम राजभर को हराया था। तब समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था. बीजेपी चौथे स्थान पर रही थी। 2007 के चुनाव में बतौर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे मुख्तार ने बसपा के विजय प्रताप को हराया था।

बदले सियासी समीकरण का नतीजा है मायावती का फैसला

दरअसल समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी विधानसभा चुनाव 2022 से पहले बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी को उनके समर्थकों के साथ सपा की सदस्यता दिलाई। इसके साथ ही सिबगतुल्लाह अंसारी के बेटे मन्नू अंसारी ने भी सपा की सदस्यता ग्रहण की है। इसके बाद से ही यह माना जा रहा था कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुख्तार की मऊ सदर विधानसभा सीट को लेकर बड़ा फैसला कर सकती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक प्रदेश में मौजूदा सियासी समीकरणों के चलते बसपा ने मुख्तार से पीछा छुड़ाने का मन बना लिया था। टिकट कटने की आशंका के मद्देनजर ही मुख्तार ने पिछले दिनों अपने बड़े भाई सिबगतउल्ला को समाजवादी पार्टी में शामिल कराया। मुख्तार के एक भाई अफजाल अंसारी अभी बसपा सांसद हैं।

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