Homeदेशइलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में एएसआई सर्वेक्षण पर लगाई रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में एएसआई सर्वेक्षण पर लगाई रोक

सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने दी थी चुनौती, 08 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद मामले में बड़ा फैसला दिया है। उच्च न्यायायल ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का ASI से सर्वेक्षण कराने के वाराणसी सिविल कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने वाराणसी की अदालत में इस मामले से सम्बन्धित अन्य सभी कार्रवाई पर भी रोक लगा दी है। जस्टिस प्रकाश पाडिया की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया।

वाराणसी के सीनियर डिवीजन सिविल जज ने 08 अप्रैल में एएसआई को सर्वेक्षण का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

मस्जिद की इंतजामिया कमेटी और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने वाराणसी की अदालत के फैसले का विरोध करते हुए कहा था कि इस सम्बन्ध में एक मामला पहले ही हाईकोर्ट में है। ऐसे में वाराणसी की अदालत ऐसा आदेश पारित नहीं कर सकती है और इस आदेश को रद्द किया जाना चाहिए।

मस्जिद पक्ष ने कोर्ट में कहा था कि वाराणसी सिविल कोर्ट ने सर्वेक्षण का आदेश देकर पूजा स्थल (विशेष प्रवधान) अधिनियम 1991 के आदेश का उल्लंघन किया है। इस अधिनियम के तहत 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्मस्थल को दूसरे धर्मस्थल में नहीं बदला जा सकता। वहीं मन्दिर पक्षकारों की ओर से कहा गया कि 1664 में मुगल शासक औरंगजेब ने मन्दिर को तोड़कर उसके अवशेषों पर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कराया था, जिसकी वास्तविकता जानने के लिए मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण कराना जरूरी है।

Afghanistan holds a distinction

मन्दिर पक्ष का दावा है की मस्जिद परिसर की खुदाई के बाद मन्दिर के अवशेषों पर तामीर मस्जिद के सबूत अवश्य मिलेंगे। इसलिए एएसआई सर्वेक्षण किया जाना बेहद जरूरी है। मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण से यह साफ हो सकेगा की मस्जिद जिस जगह तामीर हुई है, वह जमीन मन्दिर को तोड़कर बनाई गई है या नहीं।

इस मामले में बहस के बाद हाईकोर्ट ने 31 अगस्त को फैसला सुरक्षित कर लिया था। याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि दो हफ्ते बाद हम हाईकोर्ट के सामने केस से जुड़ी जानकारी रखेंगे। उच्च न्यायालय ने इस मामले में सभी पक्षों से दो हफ्ते में नए सिरे से जवाब दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई 08 अक्टूबर को होगी, तब तक निचली अदालत के फैसले पर रोक लगी रहेगी। अदालत के फैसले से मुस्लिम पक्षकारों को फौरी राहत मिली है।

उल्लेखनीय है कि अप्रैल में वाराणसी की निचली अदालत ने काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थित ज्ञानवापी के पुरातात्विक सर्वेक्षण के दिए आदेश दिए थे। वाराणसी के सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज आशुतोष तिवारी ने सर्वेक्षण कराने का फैसला दिया था। इस फैसले में केन्द्र के पुरातत्व विभाग के पांच विशेषज्ञों की टीम बनाकर पूरे परिसर का अध्ययन कराने के निर्देश दिया गया था। वाराणसी के स्थानीय वकील विजय शंकर रस्तोगी ने दिसम्बर 1991 में सिविल जज की अदालत में स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर की ओर से एक आवेदन दायर किया था, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के विशेषज्ञों से संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर का सर्वेक्षण करने का अनुरोध किया गया था। उन्होंने स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर के ‘वाद मित्र’ के रूप में याचिका दायर की थी।

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