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इलाहाबाद उच्च न्यायालय: गो मांस खाना मौलिक अधिकार नहीं, गोरक्षा हो हिन्दुओं का मौलिक अधिकार

प्रयागराज। उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि गाय का मांस खाना किसी का मौलिक अधिकार नहीं है। जीभ के स्वाद के लिए जीवन का अधिकार नहीं छीना जा सकता। गाय का भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान है। गाय को भारत देश में मां के रूप में जाना जाता है और देवताओं की तरह उसकी होती पूजा है। इसलिए गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया जाना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि बूढ़ी बीमार गाय भी कृषि के लिए उपयोगी है। इसकी हत्या की इजाजत देना ठीक नहीं। यदि गाय को मारने वाले को छोड़ा गया तो वह फिर अपराध करेगा। गाय के संरक्षण को हिन्दुओं का मौलिक अधिकार में शामिल किया जाए। भारत में विभिन्न धर्मों के नेताओं और शासकों ने भी हमेशा गो संरक्षण की बात की है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 48 में भी कहा गया है कि गाय नस्ल को संरक्षित करेगा और दुधारू व भूखे जानवरों सहित गो हत्या पर रोक लगाएगा। भारत के 29 राज्यों में से 24 में गो हत्या पर प्रतिबंध है।

कोर्ट ने कहा कि देश के 29 में से 24 राज्यों में गोवध प्रतिबंधित है। एक गाय जीवनकाल में 410 से 440 लोगों का भोजन जुटाती है। वहीं, गोमांस से केवल 80 लोगों का पेट भरता है। महाराजा रणजीत सिंह ने गो हत्या पर मृत्यु दंड देने का आदेश दिया था। यही नहीं, कई मुस्लिम और हिंदू राजाओं ने गोवध पर रोक लगाई थी। गाय का मल व मूत्र असाध्य रोगों में लाभकारी है। गाय की महिमा का वेदों-पुराणों में बखान किया गया है। रसखान ने कहा है कि ‘उन्हें जन्म मिले तो नंद के गायों के बीच मिले।’ गाय की चर्बी को लेकर मंगल पांडेय ने क्रांति की थी। संविधान में भी गो संरक्षण पर बल दिया गया है।

न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने यह टिप्पणी गो हत्या के आरोपी संभल के जावेद की जमानत अर्जी खारिज करते हुए दी है। आरोप है कि जावेद साथियों के साथ खिलेंद्र सिंह की गाय चुराकर जंगल ले गया। वहां अन्य गायों सहित खिलेंद्र की गाय को मारकर उसका मांस इकट्ठा करते टार्च की रोशनी में देखा गया। शिकायतकर्ता ने गाय के कटे सिर से पहचान की। आरोपित मौके से मोटरसाइकिल छोड़कर भाग गया। बाद में उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। याची 08 मार्च 2021 से जेल में बंद हैं।

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न्यायमूर्ति ने कहा कि यह आवेदक का पहला अपराध नहीं है, इससे पहले भी उसने गोहत्या की है, जिससे समाज का सौहार्द बिगड़ गया है और जमानत पर रिहा होने पर वह फिर से वही काम करेगा जिससे समाज में सौहार्द बिगड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को संसद में बिल लाकर गाय को मौलिक अधिकार में शामिल करते हुए राष्ट्रीय पशु घोषित करना होगा और उन लोगों के विरुद्ध् कड़े कानून बनाने होंगे, जो गायों को नुकसान पहुंचाते हैं। कोर्ट ने कहा कि जब गाय का कल्याण तभी इस देश का कल्याण होगा।

कोर्ट ने कहा कि गाय के संरक्षण, संवर्धन का कार्य मात्र किसी एक मत, धर्म या संप्रदाय का नहीं है बल्कि गाय भारत की संस्कृति है और संस्कृति को बचाने का काम देश में रहने वाले हर एक नागरिक, चाहे वह किसी भी धर्म की उपासना करने वाला हो, की जिम्मेदारी है।

कोर्ट ने फैसले में टिप्पणी की है कि कुछ लोग गाय के साथ एक दो फोटो खिंचाकर सोचते हैं कि गो संवर्धन का काम हो गया। उनका गाय की सुरक्षा से कोई सरोकार नहीं होता है। उनका एकमात्र उद्देश्य गाय की सुरक्षा के नाम पर पैसे कमाना होता है।

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