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अमेरिका ने भी माना नहीं बदला तालिबान, राष्‍ट्रपति जो बाइडन बोले-अन्य आतंकी संगठन भी बड़ा खतरा

वाशिंगटन। अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमत के आने के बाद दुनिया भर में जहां हलचल है, वहीं अब अमेरिका ने भी मान लिया है कि तालिबान के बदलने जैसी कोई बात नहीं है। वह अभी भी पहले जैसा है। इसलिए न सिर्फ तालिबान बल्कि अन्य आतंकी संगठनों से भी सचेत रहने की जरूरत है। अमेरिका के राष्‍ट्रपति जो बाइडन ने एक इंटरव्यू में इस तरह की बात कहकर सनसनी फैला दी है। अमेरिकी सैनिकों के अफगानिस्तान से वापसी के साथ ही दुनिया को एक नया परिदृश्य देखने को मिला है। तालिबानियों की क्रूरता की हर रोज नई तस्वीरें सामने आ रही हैं।

इस इंटरव्यू के हवाले से कहा जा रहा है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने कहा है कि अफगानिस्तान की सत्‍ता पर कब्‍जा करने के बाद तालिबान अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है। वर्तमान में अल कायदा और उसके साथ मिले हुए दूसरे आतंकी संगठनों से दुनिया के तमाम हिस्सों के लिए खतरा बढ़ गया है।

अफगानिस्‍तान की सत्‍ता पर हथियारों और जिहाद के बूते कब्‍जा करने वाला तालिबान दुनिया भर में समर्थन जुटाने की जीतोड़ कोशिश में लगा है, लेकिन दुनिया के सभी देश समझ लें कि इस आतंकी गुट में बिल्कुल भी बदलाव नहीं आया है। वह तथा अन्य आतंकी संगठन आज भी दुनियाभर के लिए एक बड़ा खतरा हैं।

अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने कहा है कि अफगानिस्‍तान की सत्‍ता पर हथियारों और जिहाद के बूते कब्‍जा करने वाला तालिबान दुनिया भर में समर्थन जुटाने की जीतोड़ कोशिश में लगा है, लेकिन दुनिया के सभी देश समझ लें कि इस आतंकी गुट में बिल्कुल भी बदलाव नहीं आया है। वह तथा अन्य आतंकी संगठन आज भी दुनियाभर के लिए एक बड़ा खतरा हैं। बाइडन ने कहा कि तालिबान अफगानिस्तान की सत्‍ता पर कब्‍जा करने के बाद अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है।राष्‍ट्रपति बाइडन को इस बात पर भी हैराीन हो रही है कि तालिबान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एक वैध सरकार के तौर पर मान्‍यता पाना चाह रहा है।

अमेरिका के सैनिकों की अफगानिस्तान से वापसी के बाद राष्‍ट्रपति बाइडन दावा कर रहे थे कि अफगानी सुरक्षा बल अपने देश की सुरक्षा करने में सफल होगा। राष्ट्रपति जो बाइडन ने भरोसा जताया था कि इस देश के तीन लाख सुरक्षा बल तालिबान का मुकाबला करने में सक्षम साबित होंगे। उन्होंने कहा था कि इन बलों को अमेरिका ने ट्रेनिंग और आधुनिक हथियार भी दिए गए हैं। ये सम्भावना बेहद कम है कि तालिबान सब कुछ को कुचलते हुए पूरे देश पर कब्जा जमा लेगा। लेकिन, तालिबानी आतंकियों के आगे सुरक्षा बलों को हथियार डालते देर नहीं लगी।

तालिबान: तीन सदी में तीसरी बार महाशक्ति का अभिमान हुआ चूर, भारत की क्या होगी रणनीति

अफगानिस्तान में तालिबान को वर्ष 2001 में सत्ता से बेदखल करने वाले अमेरिका ने कभी सोचा नहीं था कि तालिबानियों के बढ़ते प्रभाव के कारण कभी उसकी सेना को अपना बोरिया बिस्तर लेकर वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ेगा। जो अमेरिका दुनिया के सामने अपनी ताकत का प्रदर्शन करने से नहीं चूकता, वह एक छोटे से मुल्क के लड़ाकों से कैसे हार गया, ये सबक उसे हमेशा याद रहेगा।

अमेरिका से पहले ब्रिटेन और फिर सोवियत संघ भी इसी तरह मुंह की खा चुके हैं। इस तरह पिछली तीन सदी में ऐसा तीसरी बार हुआ जब किसी महाशक्ति का अभिमान चूर-चूर हुआ हो। अमेरिका इस जंग में 750 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च करने और अपने हजारों सैनिकों को गंवाने के बाद वापसी को मजबूर हुआ है। वैसे इसकी पटकथा 2018 से ही लिखा जाना शुरू हो गया था। तालिबान ने अमेरिका के साथ वर्ष 2018 में बातचीत शुरू की थी। वहीं फरवरी, 2020 में दोहा में दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते में अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को हटाने की बात कही।

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