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चीन ने फिर की लद्दाख में घुसपैठ, डेमचोक के भारतीय इलाके में लगाए तंबू

– चीन से 12वें दौर की वार्ता के लिए अभी कोई तारीख तय नहीं
– भारत ने 15 हजार से अधिक अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया

नई दिल्ली। पाकिस्तानी सेना को 22 साल पहले अपनी कारगिल की ऊंची चोटियों से भगाने का आज जश्न मना रही भारतीय सेना ने चीन से 12वें दौर की वार्ता के लिए अभी कोई तारीख तय नहीं की है। चीन ने जान-बूझकर आज ही के दिन कोर कमांडर स्तरीय वार्ता का प्रस्ताव रखा था लेकिन भारत ने विजय दिवस को देखते हुए चर्चा को कुछ दिनों के लिए स्थगित करने के लिए कहा। अब वार्ता की अगली तारीख तय करने के बजाय चीनी सेना ने डेमचोक इलाके में आगे बढ़कर भारतीय क्षेत्र में अपने तंबू लगाकर नया विवाद खड़ा कर दिया है।

पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर मई, 2020 से चल रहे गतिरोध को दूर करने और विस्थापन प्रक्रिया पर चर्चा करने के लिए भारत-चीन के बीच अंतिम कोर कमांडर स्तरीय वार्ता 09 अप्रैल को हुई थी। पूर्वी लद्दाख की स्थिति पर भारत और चीन के बीच जल्द ही 12वें दौर की वार्ता होने की चर्चा के बीच एलएसी पर चीनी आक्रमण का मुकाबला करने के लिए भारत ने 15 हजार से अधिक अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया है।

जम्मू-कश्मीर में सेना के आतंकवाद-रोधी अभियानों से लद्दाख क्षेत्र में स्थानांतरित इस एक डिवीजन को इसलिए तैनात किया गया है ताकि चीनियों की किसी भी आक्रामकता या दुस्साहस के संभावित प्रयास से निपटा जा सके। एक अधिकारी ने कहा कि समाधान खोजने में देरी विश्वास की कमी के कारण हुई और यही कारण है कि दोनों पक्षों के पास इस क्षेत्र में लगभग 50 हजार सैनिक तैनात हैं।

इस बीच चीनी सेना ने पूर्वी लद्दाख के डेमचोक में चारडिंग नाला के भारतीय हिस्से में तंबू लगाए हैं। इन तंबुओं में रहने वाले लोगों को ‘नागरिक’ बताया जा रहा है। भारत उन्हें वापस जाने के लिए भी कहा है लेकिन उनकी उपस्थिति बनी हुई है।

यह डेमचोक वही इलाका है जहां पहले भी भारतीय और चीनी सैनिकों का आमना-सामना हो चुका है। 1990 के दशक में भारत-चीन संयुक्त कार्य समूहों की बैठकों के दौरान दोनों पक्षों ने भी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर डेमचोक और ट्रिग हाइट्स को विवादित बिंदु माना था।

बाद में भारत-चीन ने नक्शों का आदान-प्रदान करके डेमचोक और ट्रिग हाइट्स के अलावा 10 और क्षेत्रों को विवादित के रूप में मान्यता दी गई जिनमें समर लुंगपा, डेप्सांगबुलगे, प्वाइंट 6556, चांग्लुंग नाला, कोंगका ला, पैन्गोंग झील का उत्तरी किनारा, स्पैंगगुर, माउंट सजुन, दुमचेले और चुमार इलाके शामिल थे।

पूर्वी लद्दाख में मई, 2020 से शुरू हुए गतिरोध के बाद इन 12 क्षेत्रों के अलावा दोनों पक्षों की अलग-अलग धारणाओं के मुताबिक एलएसी के पांच और विवादित क्षेत्र जोड़े गए हैं। इनमें गलवान घाटी में केएम 120, श्योक सुला क्षेत्र में पीपी-15 और पीपी-17ए, रेचिन ला और रेजांग ला हैं।

भारत पहले सभी विवादित बिंदुओं से विस्थापन पर जोर दे रहा है, जबकि चीन इससे पहले अतिरिक्त सैनिकों की मूल ठिकानों पर वापसी चाहता है। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी का कहना है कि एलएसी पर फिलहाल स्थिति स्थिर है।

हालांकि अभी अप्रैल, 2020 की पुरानी स्थिति नहीं लौटी है लेकिन पिछले साल की तुलना में ‘काफी बेहतर’ है। इसी साल फरवरी में भारत से समझौते के बाद से चीन की ओर से न तो कोई कोई सीमा उल्लंघन किया गया है और न ही दोनों सेनाओं के बीच कोई आमना-सामना हुआ है।

भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तरीय 11वें दौर की वार्ता 09 अप्रैल को पूर्वी लद्दाख के चुशुल में हुई थी। दोनों देशों के बीच 11वें दौर की वार्ता को तीन महीने हो चुके हैं। अब फिर अगली सैन्य वार्ता में पूर्वी लद्दाख के डेप्सांग मैदानी इलाकों, गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्रों से सेनाओं के विस्थापन करने पर चर्चा होने की उम्मीद है।

चीन ने कोर कमांडर-स्तरीय 12वें दौर की वार्ता के लिए 26 जुलाई का प्रस्ताव रखा था, लेकिन भारत ने बीजिंग से नई तारीख तय करने को कहा है क्योंकि भारतीय सेना आज के दिन कारगिल विजय दिवस मना रही है। कोर कमांडर स्तर की वार्ता अब अगस्त के पहले सप्ताह में या शायद इससे पहले होने की संभावना है।

सैन्य वार्ता में देरी के बावजूद दोनों पक्ष हॉटलाइन पर लगातार संपर्क में हैं। अधिकारियों ने कहा कि गतिरोध शुरू होने के बाद से दोनों पक्षों ने दौलत बेग ओल्डी और चुशुल में हॉटलाइन पर लगभग 1,500 बार संदेशों का आदान-प्रदान किया है।

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