Homeप्रेरणाएवरेस्ट फतह करने वाले देवभूमि के मनीष कसनियाल बने युवाओं की प्रेरणा,...

एवरेस्ट फतह करने वाले देवभूमि के मनीष कसनियाल बने युवाओं की प्रेरणा, मुख्यमंत्री धामी ने किया सम्मानित

देहरादून। विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर देश और देवभूमि का गौरव बढ़ाने वाले पर्वतारोही मनीष कसनियाल युवाओं के लिए मिसाल बन गये हैं। पिथौरागढ़ निवासी इस 26 वर्षीय युवा प्रतिभा की उत्तराखण्ड के घर-घर में चर्चा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मनीष को सम्मानित कर लक्ष्य के प्रति उनके दृढ़ निश्चय और समर्पण की प्रशंसा की। उन्होंने मनीष को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

आईएमएफ के मिशन मैसिफ के तहत मनीष ने अपनी महिला साथी सिक्किम की मनीता प्रधान के साथ विषम परिस्थिति में ये उपलब्धि हासिल की है। अभियान के लिए वर्ष 2019 में देशभर से 110 युवा पर्वतारोहियों का चयन किया गया। मनीष ने कड़ी मेहनत के बाद अन्तिम 12 की टीम में एवरेस्ट फतह करने के लिए जगह बनाई। इस अभियान के तहत 12 सदस्य चार समूहों में 8848 मीटर ऊंचे एवरेस्ट, 8516 मीटर ऊंचे ल्होत्से, 7864 मीटर ऊंचे पुमौरी, 7161 मीटर ऊंचे नुपसे पर्वत को एक साथ फतह करने निकले थे।

 

त्रिशूल, गंगोत्री तृतीय, बलजोरी, लामचीर, बीसी रॉय आदि बारह से अधिक पर्वत मालाएं वर्ष 2017, 18, 19 में फतह हुईं हैं। वर्ष 2018 में मनीष और ब्रिटिश पर्वतारोही जॉन जेम्स कुक ने 5782 मीटर ऊंची मुनस्यारी की चोटी नंदा लपाक को पश्चिमी छोर से फतह किया था। इस अभियान में उन्हें एक सप्ताह लगा था। वह गढ़वाल में त्रिशूल और लद्दाख में स्टोक कांगड़ी तक गए। इसके लिए मनीष को दो बार राज्यपाल पुरस्कार और राज्य स्वच्छता गौरव सम्मान भी मिल चुका है। मनीष की पहल पर ही आइस संस्था ने भुरमुनी में पहली बार वॉटर फॉल रैपलिंग की शुरुआत की थी। मनीष बिर्थी में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड के लिए हुई आइस संस्था की वॉटरफॉल रैपलिंग में भी शामिल रहे हैं।

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments