Homeराज्यलालू-मुलायम मुलाकात: चाय की चुस्कियों के साथ सियासत की बात

लालू-मुलायम मुलाकात: चाय की चुस्कियों के साथ सियासत की बात

लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष राज्यों में अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश में

नई दिल्ली। केन्द्र की सियासी लड़ाई को अभी भले ही वक्त बचा हो और कुछ राज्यों में मुख्यमंत्री की कुर्सी कब्जाने के लिए राजनीतिक दल जोर-आजमाइश में लगे हों। ऐसे में सियासत के दो धुरंधरों का चाय पर मिलना सामान्य बात नहीं हो सकती है। इस पर भी इन दोनों के नाम जब लालू प्रसाद यादव और मुलायम सिंह यादव हों और सियासी गलियारों में हलचल होना तय है।

एक जमाने में खुद को राजनीति का ‘किंग मेकर’ बताने वाले राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू यादव चारा घोटाला मामले में जमानत पर बाहर आने के बाद अब ज्यादा सक्रिय नजर आ रहे हैं। नई दिल्ली में अपनी बेटी मीसा भारती के आवास पर स्वास्थ्य लाभ कर रहे लालू प्रसाद यादव हाल ही में कई बड़े नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। इसी कड़ी में सोमवार को वह समाजवादी पार्टी के संरक्षक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से मिलने उनके आवास पर पहुंचे।

दोनों नेताओं के बीच चाय पर आधा घंटे से अधिक तक चर्चा हुई। इस दौरान सपा मुखिया अखिलेश यादव भी मौजूद रहे। उन्होंने ट्विटर पर इस मुलाकात की तस्वीरें भी साझा की। वहीं लालू प्रसाद यादव ने भी इन तस्वीरों के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश के वरिष्ठतम समाजवादी साथी मुलायम सिंह जी से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। खेत-खलिहान, गैर-बराबरी, अशिक्षा,किसानों, गरीबों व बेरोजगारों के लिए हमारी सांझी चिंताएं और लड़ाई है। आज देश को पूंजीवाद और सम्प्रदायवाद नहीं बल्कि लोकसमता एवं समाजवाद की अत्यंत आवश्यकता है।

इससे पहले लालू यादव सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार के साथ भी मुलाकात कर चुके हैं। राकांपा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सपा के साथ मिलकर लड़ेगी। दोनों दलों के बीच सीटों का बंटवारा होना अभी बाकी है। वहीं अब मुलायम-अखिलेश और लालू की मुलाकात को भी चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि उत्तर प्रदेश में सपा के मुकाबले ये दल कहीं नहीं ठहरते और यहां इनकी सियासी जमीन भी नहीं है, लेकिन जिस तरह से लालू एक के बाद एक नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं, उससे भाजपा के खिलाफ विरोधी दलों की एकजुट होने की रणनीति साफ सामने आ रही है।

सियासी विश्लेषकों के मुताबिक इन मुलाकातों के जरिए विपक्ष के नेता राज्यों में अपनी ताकत और कमजोरी को लेकर एक दूसरे से आगे की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष राज्यों में सरकार बनाकर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने जिस तरह से भाजपा को अकेले मात दी, उससे विपक्ष का आत्मविश्वास बढ़ा है। इसलिए वह अपने गुणा-भाग में अभी से लग गया है।

ममता बनर्जी का दिल्ली दौरा भी इसी सियासत का हिस्सा था। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में विपक्ष के एकजुट होने पर भाजपा को हराना मुश्किल नहीं होने की बात कही। वहीं उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विपक्ष के बुलावे पर वहां प्रचार करने का भी जिक्र किया। इस तरह चुनाव को लेकर विपक्ष की तस्वीर धीरे-धीरे साफ होती जा रही है।

इसके साथ ही केन्द्र सरकार के खिलाफ ये नेता ऐसे मुद्दे तलाश रहे हैं, जिस पर विपक्ष एक जुट हो सके और दबाव बनाने में सफल रहे। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा की अन्य दलों के नेताओं से मुलाकात उसकी रणनीति का हिस्सा भी मानी जा रही है। सपा इन दलों को कुछ सीटें देकर जहां गठबन्धन करेगी। वहीं इनके बड़े चेहरे चुनाव में भाजपा के खिलाफ प्रचार में उसके मंच पर भी नजर आ सकते हैं। सपा इसके जरिए जातीय सन्तुलन साधने की कोशिश में है।

 

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