Homeराज्यउत्तराखण्ड: हरीश रावत क्यों बोले-खून के आंसू रोएंगे भाजपाई

उत्तराखण्ड: हरीश रावत क्यों बोले-खून के आंसू रोएंगे भाजपाई

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022 (Uttarakhand Assembly Election 2022) को लेकर तैयारियों में जुटी कांग्रेस @INCUttarakhand का सत्तरूढ़ दल पर हमला तेज हो गया है। चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने वाले नेताओं पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत @harishrawatcmuk ने गुरुवार को दल बदल को लेकर कटाक्ष किया। उन्होंने यहां तक कह डाला कि आने वाले दिनों में भाजपा और उससे जुड़े लोग खून के आंसू रोएंगे।

हरीश रावत ने कहा कि #दल_बदल के 3 कारण हो सकते हैं, पहला वैचारिक कारण, दूसरा पारिवारिक कारण और तीसरा कारण आर्थिक या पदों का प्रलोभन। उत्तराखण्ड में कुछ लोगों ने पारिवारिक कारणों से, कुछ ने वैयक्तिक मतभेदों के बहुत गहरे होने के कारण, मगर दो-तीन को छोड़कर अधिकांश लोगों ने धन व पद के प्रलोभन के कारण दल-बदल किया।

हरदा ने कहा कि इस बात के गवाह कई लोग हैं, जिनको ऐसा प्रलोभन भी दिया गया जो धन व पद प्रलोभन के आधार पर दलबदल है, वो सामाजिक, राजनैतिक अपराध है, संसदीय लोकतंत्र पर कलंक है। उन्होंने कहा कि ऐसा अपराध जिस दल से दल-बदल होता है, वो दल तो केवल एक बार रोता है और जिस दिन में वो लोग जाते हैं, वो दल कई-कई बार रोता है और अभी तो भाजपाई लोग केवल रो रहे हैं और देखिएगा आगे आने वाले दिनों में कुछ खांठी के भाजपाई, संघी सब खून के आंसू रोएंगे।

हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस तो उदार पार्टी है, यदि कोई अपने अपराध के लिए क्षमा मांगे तो क्षमा भी किया जा सकता है, जो अपने पारिवारिक कारणों या वैचारिक मतभेद के कारण से गये हैं, उनके साथ वैचारिक मतभेदों को पाटा जा सकता है। मगर, भाजपा की स्थिति तो यह है, जब बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से खाएं!

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उन्होंने कहा कि जो पार्टी अपने अनुशासन की प्रशंसा करते नहीं अघाती थी, आज चौराहे पर उनके अनुशासन की धज्जियां उड़ रही हैं, संघ की शिक्षा की भी धज्जियां उड़ रही हैं, अभी तो शुरुआत है देखिए आगे क्या होता है! मगर मैं उत्तराखंड से भी कहना चाहता हूंँ कि ये जो “बोया पेड़ बबूल का, आम कहां से खाएं” वाली कहावत है, ये राज्य और समाज पर भी लागू होती है।

उन्होंने कहा कि यदि आप ऐसे आचरण के लिए कथित जनप्रतिनिधियों को दंडित नहीं करेंगे तो उसका दुष्प्रभाव, राज्य की राजनीति में अस्थिरता लाएगा और अस्थिरता का दुष्प्रभाव का राज्य के विकास को भुगतना पड़ता है, जनकल्याण को भुगतना पड़ता है और आज उत्तराखंड वही भुगत रहा है।

दरअसल विधानसभा चुनाव से सियासी लाभ के लिए नेता एक दल छोड़कर दूसरे में तेजी से जा रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस के रणनीतिकारों ने असंतुष्टों पर निगाहें रखनी शुरू कर दी हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने अंदरूनी तौर पर इस पर काम भी शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि चुनाव का ऐलान होने पर दोनों दलों के कई नेता पाला बदल सकते हैं।

इसके अलावा निर्दलीय प्रभावशाली नेताओं पर भी दोनों पार्टियों की नजर है। भाजपा धनोल्टी के निर्दलीय विधायक प्रीतम सिंह पंवार को पार्टी अपने पाले में लाने में कामयाब रही है। बुधवार को विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने नई दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और उत्तराखण्ड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने उन्हें सदस्यता ग्रहण कराई। प्रीतम उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) से भी मंत्री रह चुके हैं। उन पर कांग्रेस की भी नजर थी। लेकिन, पंवार को भाजपा रास आई।

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