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यूं ही नहीं कहा जाता Be Like Tejas…दुनिया मानती है इसकी असीम शक्ति का लोहा

नई दिल्ली। इंडियन एयर फोर्स (Indian Air Force) 08 अक्टूबर को अपना 89वां स्थापना दिवस मनायेगी। इस मौके पर भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान आसमान में अपने शौर्य का प्रदर्शन करते नजर आएंगे। वायु सेना के ऐसे ही एक युवा जाबांज लड़ाकू विमान का नाम है-‘तेजस’।

तेजस न सिर्फ हमारी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है बल्कि भारतीय वायुसेना की शान है। इसका नाम ही दुश्मनों के दिल में खौफ पैदा करने के लिए काफी है। दुनिया के ताकतवर मुल्क भी तेजस की क्षमता का लोहा मानते हैं। इस लड़ाकू विमान का ये नाम संस्कृत के 20 नामों में से चुना गया था। संस्कृत में तेजस शब्द का मतलब होता है असीम शक्ति यानि सबसे शक्तिशाली।

 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया देश में बनाए हल्के लड़ाकू विमान ‘तेजस’ में उड़ान भरकर उसकी संचालन तथा मारक क्षमता को परख चुके हैं। देश के प्रमुख रक्षा उपक्रम हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा बनाया गया ‘तेजस’ विमान पहले से ही वायुसेना के बेड़े में शामिल है और अब उसके उन्नत संस्करण तैयार किए जा रहे हैं। देश में 1 जुलाई 2016 को भारतीय वायुसेना की पहली तेजस यूनिट का निर्माण किया गया, जिसका नाम ‘नम्बर 84 स्क्वाड्रन आईएएफ फ्लाइंग ड्रैगर्स’ है।

एयर चीफ मार्शल भदौरिया के मुताबिक भारतीय वायुसेना ने अगले दो दशकों में 83 एलसीए तेजस सहित 350 विमान खरीदने की योजना बनाई है। केन्द्र सरकार ने इस वर्ष फरवरी में सरकारी विमान निर्माता कम्पनी एचएएल को 83 एलसीए तेजस विमानों के लिए 48,000 करोड़ रुपये का ठेका दिया था। इससे पहले, कुल 40 तेजस का ऑर्डर दिया जा चुका था, जिनमें से आधे की डिलीवरी भारतीय वायुसेना को की जा चुकी है। कुल मिलाकर, इसमें 123 विमान हैं जो 6 स्क्वाड्रन के बराबर हैं।

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दरअसल भारतीय वायु सेना के स्क्वाड्रन की संख्या स्वीकृत 42 से घटकर 30 हो गई है। IAF इस अंतर को भरने के लिए आशान्वित है। प्रत्येक स्क्वाड्रन में लगभग 18-20 विमान होते हैं। एयर चीफ मार्शल भदौरिया का कहना है कि पड़ोसियों को देखते हुए, हमें घर में निर्मित विशिष्ट तकनीक की आवश्यकता है। यही हमें अगले संघर्ष में बेस्ट रिजल्ट और बेहतरीन माइलेज देगा।

लड़ाकू विमान तेजस की खरीद के लिए 48,000 करोड़ की डील को कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) काफी पहले ही मंजूरी दे चुकी है। वायुसेना की मजबूती के लिए यह फैसला किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक भारतीय रक्षा विनिर्माण सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ये डील रक्षा क्षेत्र में गेमचेंजर साबित होगी।

अटल बिहारी वाजपेयी से है तेजस का खास कनेक्शन

अगस्त 1983 में हल्का युद्धक विमान यानी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (Light Combat Aircraft) प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई थी। इसके 18 साल बाद 4 जनवरी, 2001 को तेजस ने पहली उड़ान भरी। विमान का आधिकारिक नाम तेजस 4 मई 2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रखा था।

जानिए तेजस की खासियत के बारे में

– तेजस में एक साथ 9 तरह के हथियार लोड और फायर किए जा सकते हैं।
– तेजस में एंटीशिप मिसाइल, बम और रॉकेट भी लगाए जा सकते हैं।
– तेजस पर हवा से हवा में, हवा से धरती और हवा से पानी पर हमला करने वाले हथियार लोड कर सकते हैं।
– तेजस‌ में जैमर-प्रोटक्शन तकनीक है ताकि दुश्मन की सीमा के करीब उसका कम्युनिकेशन बंद न हो।
– तेजस को 42 फीसदी कार्बन फाइबर, 43 फीसदी एल्यूमीनियम एलॉय और टाइटेनियम से बनाया गया है।

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