Homeदेशभारतीय वायु सेना आज मना रही अपने शौर्य-पराक्रम का 89वां स्थापना दिवस

भारतीय वायु सेना आज मना रही अपने शौर्य-पराक्रम का 89वां स्थापना दिवस

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) आज अपना 89वां स्थापना दिवस मना रही है। ये वर्ष उसके शौर्य और पराक्रम के नाम रहे हैं और पूरी दुनिया ने उसकी ताकत का लोहा माना है।

हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पर आज वायुसेना के स्थापना दिवस पर 1971 में हुए भारत पाकिस्तान युद्ध की विजय गाथा को भी दिखाया जाएगा। भारत पाकिस्तान युद्ध के पचास वर्ष पूरे होने पर वायुसेना इस वर्ष को विजय वर्ष के रूप में समर्पण कर रही है। वायुसेना दिवस पर लगने वाले विमानों की प्रदर्शनी में पाक से युद्ध में महत्वपूर्ण रोल निभाने वाले फाइटर प्लेन डिनैट को बीच में जगह दी गई है।

भारतीय वायुसेना की स्थापना आठ अक्टूबर, 1932 को हुई थी। उस समय वायुसेना को रॉयल इंडियन एयर फोर्स (आरआईएएफ) कहा जाता था। इसके पांच माह बाद 1 अप्रैल 1933 को वायुसेना का पहला दस्ता बना जिसमें 6 आएएफ-ट्रेंड ऑफिसर और 19 हवाई सिपाहियों को शामिल किया गया था। आजादी के बाद वायुसेना के नाम में से “रॉयल” शब्द को हटाकर सिर्फ “इंडियन एयरफोर्स” कर दिया गया था। भारतीय वायुसेना ने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भी अहम भूमिका निभाई थी।

इसके अलावा 971 में वायुसेना ने पाकिस्तान को धूल चटाने में बेहद अहम भूमिका अदा की। दिसम्बर 1971 में पाकिस्तान के छह फाइटर प्लेन ने श्रीनगर स्टेशन पर हमला बोलकर युद्ध की शुरुआत की। जिसके बाद भारत ने अपने लड़ाकू विमान डिनैट की मदद से पाकिस्तान को हराया। इस युद्ध में डिनैट लड़ाकू विमान का अहम रोल रहा। इस एक सिंगल सीटर विमान ने युद्ध के दौरान पाकिस्तान के फाइटर प्लेन को खदेड़ने के साथ ही दो विमानों को नष्ट कर दिया था। यह लड़ाई भारतीय वायुसेना की सबसे फाइन वॉर रही। इस दौरान जान की बाजी लड़ाने वाले एक जवान को एक परमवीर चक्र, 13 को महावीर चक्र और 130 वीर चक्र जवानों को दिए गए थे।

इंडियन एयर फोर्स दुनिया की वायुसेनाओं में अमेरिका, चीन और रूस के बाद चौथे नम्बर की वायुसेना है। भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य है- ‘नभ: स्पृशं दीप्तम’। यह गीता के 11वें अध्याय से लिया गया है। यह महाभारत के युद्ध के दौरान कुरूक्षेत्र में भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेश का एक अंश है।

08 अक्टूबर, 1932 से धीरे-धीरे प्रगति करती हुई अपने 89 वर्ष पूरे कर 90वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। इन 89 वर्षो के इतिहास में ऐसे कई अवसर आए जब भारतीय वायुसेना के जांबाजों ने शत्रु के दांत खट्टे करके अपनी ताकत का एहसास करवाया। प्रत्येक चुनौती के समय भारतीय वायुसेना ने अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया है।

पिछले कुछ वर्षों में चीन व पाकिस्तान सीमा पर चुनौतियां काफी बढ़ी हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए वायुसेना की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 33 स्क्वाड्रन लड़ाकू विमान हैं। वहीं अब राफेल विमानों के आ जाने से वायुसेना बेहद मजबूत हो गई है। लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली मिटियार मिसाइलों से लैस राफेल विमान चीन के लिए बेहद घातक सिद्ध होंगे। यही नहीं, हल्के तेजस विमान भी मिग-21 विमानों की जगह ले रहे हैं। राफेल और तेजस के अलावा सुखोई-30 एमकेआई विमान भी चीन से टक्कर लेने को तैयार हैं। ये विमान हवा से जमीन में मार करने वाले बेहद खतरनाक माने जाते हैं।

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भारतीय वायु सेना के बेड़े में मिग-29 मल्टी रोल एयरक्राफ्ट और जगुआर जैसे हर मौसम में लड़ाई के तैयार रहने वाले लड़ाकू विमान भी हैं। चीन से लगती सीमा के पास प्रमुख हवाई अड्डों पर दुनिया के सबसे हाईटेक मल्टीरोल हेलीकाप्टर अपाचे एवं चिनूक हर मोर्चे से निपटने में सक्षम हैं। इस तरह किसी भी स्थिति में निपटने को भारतीय वायुसेना पूरी तरह सक्षम है।

वायुसेना ध्वज
वायुसेना ध्वज, वायु सेना निशान से अलग, नीले रंग का है जिसके शुरुआती एक चौथाई भाग में राष्ट्रीय ध्वज बना है और बीच के हिस्से में राष्ट्रीय ध्वज के तीनों रंगों अर्थात्‌ केसरिया, श्वेत और हरे रंग से बना एक वृत्त (गोलाकार आकृति) है। यह ध्वज 1951 में अपनाया गया।

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