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भारतीय सेना की तेहराम शेहर ग्लेशियर की पांच अछूती चोटियों की एक साथ जीतने की जिद, रवाना

-आज तक नहीं पहुंच सका कोई भी इंसान, इतिहास रचने को तैयार भारत

नई दिल्ली। भारतीय सेना के पर्वतारोही अब तक के एक बेहद अहम मिशन को अंजाम देने के लिए निकल पड़े हैं। भारतीय सेना ने पांच ऐसी चोटियों पर ​जीत हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जहां आज तक कोई इंसान नहीं पहुंचा है।

इन चोटियों को अब तक अछूती चोटियों के नाम से जाना जाता है। किसी ने इन पर चढ़ने की हिम्मत नहीं की, लेकिन भारतीय सेना के पर्वतारोही नामुमकिन को मुमकिन बनाने के लिए इस मिशन को अंजाम देने के लिए चल पड़े हैं।

सियाचिन बेस कैंप से मेजर जनरल आकाश कौशिक, चीफ ऑफ स्टाफ, फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने सियाचिन ग्लेशियर के पास तेहराम शेहर ग्लेशियर में स्थित इन पांच अछूती चोटियों पर एक साथ चढ़ने के लिए अभियान को हरी झंडी दिखाई।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक लद्दाख स्काउट्स रेजिमेंट अप्सरासस प्रथम, अप्सरासस द्वितीय, अप्सरासस तृतीय, पीटी-6940 और पीटी-7140 एक साथ चढ़ने का प्रयास करेगी। सियाचिन बेस कैम्प में आयोजित समारोह में कैम्प में तैनात सैनिकों के साथ-साथ भारतीय सेना के अनुभवी लोगों ने भाग लिया और जवानों की हौसला अफजायी की।

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सियाचिन ग्लेशियर हिमालय की पूर्वी काराकोरम पर्वतमाला में भारत-पाक नियंत्रण रेखा के पास लगभग स्थित है। यह काराकोरम की पांच बड़े हिमानियों में सबसे बड़ा और ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर विश्व की दूसरी सबसे बड़ा ग्लेशियर है। समुद्रतल से इसकी ऊंचाई इसके स्रोत इंदिरा कोल पर लगभग 5,753 मीटर और अंतिम छोर पर 3,620 मीटर है। सियाचीन में सर्दियों में माइनस 60 डिग्री से नीचे चला जाता है तापमान सियाचिन दुनिया का हाइएस्‍ट वॉर जोन है। ऐसे में यहां पर तैनात सैनिकों को कई तरह के मुश्किलों का सामना भी करना पड़ता है।

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