Homeदेशजिन्ना प्रकरण: मुख्यमंत्री योगी बोले विभाजनकारी मानसिकता स्वीकार नहीं, अखिलेश मांगे माफी

जिन्ना प्रकरण: मुख्यमंत्री योगी बोले विभाजनकारी मानसिकता स्वीकार नहीं, अखिलेश मांगे माफी

लखनऊ। मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर दिया बयान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के गले की फांस बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की जनता से माफी मांगने की बात कही।

उन्होंने मुरादाबाद में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि सरदार वल्लभाई पटेल देश की एकता और अखण्डता के आधार हैं, इसके शिल्पी हैं। आजाद भारत को एक सूत्र में पिरोने और अखण्ड भारत के वर्तमान स्वरूप लाने का श्रेय किसी का जाता है तो वो सरदार पटेल हैं। विरोधियों की विभाजनकारी मानसिकता एक बार फिर सामने आ गई, जब उन्होंने सरदार पटेल को जिन्ना के समक्ष रखकर, देश को तोड़ने वाले जिन्ना की महिमा मंडित करने का काम किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे लगता है कि भारत की जनता इस विभाजनकारी मानसिकता को कभी स्वीकार नहीं करेगी। उत्तर प्रदेश की जनता तो इसे हरगिज स्वीकार नहीं करेगी। ये तालिबानी मानसिकता है, जो हमेशा तोड़ने में विश्वास करता है। सामाजिक ताने बाने को जातिवाद के नाम पर तोड़ने वाले जब अपने मंसूबों में सफल नहीं हुए तो महापुरुषों पर लांछन लगाकर पूरे समाज को अपमानित करने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस दुष्प्रवृत्ति को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरे समाज को और प्रदेश को इसकी निंदा करनी चाहिए। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को अपने इस कृत्य के लिए देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। सरदार पटेल का अपमान देश कभी स्वीकार नहीं कर सकता है।

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केशव बोले करोड़ों लोगों के संघर्ष और सरदार पटेल का अपमान

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी मामले को लेकर सपा अध्यक्ष पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने जिन्ना प्रति प्रेम जता के देश के विभाजन के समय करोड़ों लोगों के संघर्ष को ही नहीं अपितु सरदार पटेल को भी अपमानित किया है।

 

दोनों पार्टियों की मिलीभगत, सोची समझी रणनीति का हिस्सा: मायावती

उधर बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसे भाजपा और सपा की मिलीभगत करार दिया है। उन्होंने आज कि सपा मुखिया द्वारा जिन्ना को लेकर कल हरदोई में दिया गया बयान व उसे लपक कर भाजपा की प्रतिक्रिया यह इन दोनों पार्टियों की अन्दरुनी मिलीभगत व इनकी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है ताकि यहां यूपी विधानसभा आमचुनाव में माहौल को किसी भी प्रकार से हिन्दू-मुस्लिम करके खराब किया जाए। सपा व भाजपा की राजनीति एक-दूसरे के पोषक व पूरक रही है। इन दोनों पार्टियों की सोच जातिवादी व साम्प्रदायिक होने के कारण इनका आस्तित्व एक-दूसरे पर आधारित रहा है। इसी कारण सपा जब सत्ता में होती है तो भाजपा मजबूत होती है जबकि बीएसपी जब सत्ता में रहती है तो भाजपा कमजोर।

अखिलेश के इस बयान के बाद मचा सियासी बवाल

इससे पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रविवार को हरदोई की एक जनसभा में मोहम्मद अली जिन्ना की, भारत की आजादी के लिए उनके योगदान की सराहना की थी। सपा प्रमुख ने कहा कि ‘सरदार वल्लभ भाई पटेल, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और (मोहम्मद अली) जिन्ना ने एक ही संस्थान से पढ़ाई की और बैरिस्टर बने और उन्होंने आजादी दिलाई। उन्हें आजादी के लिए किसी भी तरीके से संघर्ष करना पड़ा होगा तो पीछे नहीं हटे।’

भाजपा सांसद ने दी अखिलेश को इतिहास पढ़ने की नसीहत

मोहम्मद अली जिन्ना की सराहना करने के बाद से ही अखिलेश विरोधी दलों के निशाने पर हैं। भाजपा के राज्‍यसभा सदस्‍य और उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने कहा कि सपा मुखिया अखिलेश यादव ने लौह पुरुष की तुलना जिन्ना से की है। अखिलेश यादव को पहले इतिहास पढ़ लेना चाहिए। जिन्ना ने आजादी से पहले 16 अगस्त 1946 को एक कॉल दिया था। डायरेक्ट ऐक्शन। यह दिन जुमा का था, शुक्रवार का दिन था।

बृजलाल ने कहा कि जिस दिन कलकत्ता और आज का बांग्लादेश में कत्लेआम हुआ था। हजारों हिन्दू मारे गए थे। वह जिन्ना जिसने कत्लेआम कराया और वह देश के बंटवारे के जिम्मेदार हैं। जिन्ना यह सब करता था। जिन्ना हैदराबाद को साउथ पाकिस्तान बनाना चाहता था, निजाम के पक्ष में। वह जिन्ना जो देश के बंटवारे का जिम्मेदार है। 1946 को देश के मुसलमानों को भरमाया और चुनाव में 90 फीसदी देश के मुसलमानों ने मुस्लिम लीग को वोट किया। भाजपा सांसद ने कहा कि अखिलेश यादव जी सरदार पटेल की जयन्ती के एक दिन पहले आपके पिताजी मुलायम सिंह यादव ने 30 अक्टूबर, 1990 को अयोध्या में रामभक्तों पर गोली चलवाई थी, मां सरयू का आंचल लाल हो गया था। तुष्टिकरण में इतना नीचे मत गिरो।

 

 

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