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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड: तालिबान-अफगानिस्तान की राजनीतिक स्थिति पर कोई टिप्पणी नहीं की

लखनऊ। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने तालिबान और अफगानिस्तान की राजनीतिक स्थिति को लेकर किसी भी टिप्पणी से इनकार किया है। बोर्ड ने कहा है कि मीडिया में रही कुछ खबरों में मामले को लेकर टिप्पणी को उसका पक्ष बताया जा रहा है, जबकि ऐसा नहीं है। उसने तालिबान और अफगानिस्तान से जुड़ी किसी तरह का कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

बोर्ड ने बुधवार का कहा कि तालिबान और अफगानिस्तान की राजनीतिक स्थिति पर उसने कोई टिप्पणी नहीं की है। कुछ मीडिया चैनल बोर्ड के कुछ सदस्यों की निजी राय को बोर्ड का स्टैंड मानकर गलत बात पर बोर्ड को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। यह बात पत्रकारिता मूल्यों के विपरीत है। संस्था ने स्पष्ट किया कि मीडिया चैनलों को इस तरह के कृत्यों से बचते हुए बोर्ड से तालिबान की खबरों को नहीं जोड़ना चाहिए।

वहीं तालिबानी लड़ाकों की देश के स्वतंत्रता सेनानियों के साथ तुलना करने पर समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क भी बैकफुट पर आ गए हैं। बर्क ने आज कहा कि उनके बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया है। उन्होंने तालिबान के समर्थन में बयान नहीं दिया। इस तरह के आरोप बिल्कुल गलत है।

शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा कि मैने बोला था कि मैं इस मुद्दे पर कुछ नहीं कह सकता। उस तालिबान से मेरा क्या सम्बन्ध। मैं न तालिबान के साथ हूं, न मैं उसकी सराहना करता हूं, न मैंने इसके सम्बन्ध में कोई बयान दिया है। दरअसल बयान की टिप्पणी को लेकर सम्भल कोतवाली पुलिस ने उनके खिलाफ राजद्रोह समेत कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। यह रिपोर्ट भाजपा के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश सिंघल की तहरीर के आधार पर की गई। इसकी पुष्टि पुलिस अधीक्षक ने की है।

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संभल के पुलिस अधीक्षक चक्रश मिश्रा ने बताया कि थाना संभल कोतवाली में सांसद शफीकुर्रहमान बर्क और दो अन्य फैजान चौधरी व मोहम्मद मुकीम के ख़िलाफ अभियोग पंजीकृत किया गया है। तहरीर में बताया गया कि इन्होंने तालिबान के सम्बन्ध में भड़काऊ बयान दिए, एक मीडिया ब्रीफिंग में तालिबान की तुलना भारत के स्वाधीनता सेनानियों से की गई। इनके खिलाफ धारा 124ए, 153ए, 195ए आइपीसी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इस तरह के बयान देशद्रोह की श्रेणी में आते हैं।

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