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स्विगी-जोमैटो जैसे फूड डिलीवरी एप से ऑनलाइन खाना मंगाने पर जेब ज्यादा होगी ढीली, जाने क्यों?

लखनऊ। अगली बार जब आप स्विगी और जोमैटो जैसे फूड डिलीवरी एप से हर बार की तरह ऑनलाइन खाना मंगायें तो जेब पहले की अपेक्षा ज्यादा ढीली करनी होगी। इसकी वजह जीएसटी काउंसिल बैठक में किये फैसलों का होना है।

दरअसल जीएसटी काउंसिल ने कर चोरी को रोकने के लिए जोमैटो और स्विगी जैसे फूड डिलिवरी एप को जीएसटी के दायरे में लाने का फैसला किया है। हालांकि यह नया टैक्स नहीं है। अभी तक की व्यवस्था में यह टैक्स रेस्टोरेंट को देना होता था। लेकिन, कई बार वसूली के समय ढूंढ़ने पर रेस्टोरेंट मिलते नहीं थे। ऐसे में कर चोरी को रोकने के मकसद से जीएसटी काउंसिल ने तय किया है कि फूड डिलिवरी के जरिये खानपान की आपूर्ति में जीएसटी अब उस प्वाइंट से लिया जाएगा जहां खाने की डिलिवरी हुई हो। ऐसे में अब एग्रीगेटर यानि फूड डिलिवरी कम्पनियों को यह टैक्स देना होगा। जाहिर तौर पर इसका असर ग्राहक की जेब पर पड़ेगा। वहीं पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों से फिलहाल राहत नहीं मिलने वाली है। अधिकांश राज्य पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर सहमत नहीं हुए।

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अक्टूबर से जीएसटी की नई दरें इन वस्तुओं पर इस तरह होग लागू-

  • पौष्टिकता से भरपूर फोटिफाइड चावल पर जीएसटी दर अब 18 की बजाय मात्र 05 फीसदी होगी।
  • बायोडीजल पर जीएसटी की दर को 12 से घटाकर 05 पांच फीसदी कर दिया गया है।
  • दिव्यांगों द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले वाहनों की रेट्रो फिटमेंट किट पर जीएसटी की दर को घटाकर 05 फीसदी हो गई है।
  • कागज से बने कार्ड, कैटेलाग व प्रिंटेड सामग्री महंगी होगी। इस पर 12 से 18 फीसदी जीएसटी कर दिया गया है।
  • कागज से बने कार्टन, बाक्स, बैग व पैकिंग कंटेनर पर अब 18 फीसदी जीएसटी देनी होगी।
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