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 विश्व दिव्यांग दिवस पर विशेष: फाइलेरिया से दिव्यांग हुए लोगों को भी मिले सरकारी योजनाओं का लाभ

– दिव्यांगता प्रमाण पत्र न मिलने से फाइलेरिया रोगी मायूस

लखनऊ। विश्व दिव्यांग दिवस (03 दिसम्बर) की पूर्व संध्या पर अपना दर्द साझा करते हुए कानपुर के घाटमपुर तहसील के ग्राम भदरस निवासी 70 वर्षीय मुल्लू ने कहा कि वह पिछले 25 वर्षों से हाइड्रोसील से पीड़ित हैं। उनके अंडकोष का वजन करीब 10 किलोग्राम हो गया है, जिससे उनका उठना-बैठना और चलना-फिरना मुश्किल हो गया है। यहां तक कि मजबूरी में शौच क्रिया भी खड़े होकर करनी पड़ती है। अगर सरकारी योजना के तहत उन्हें ट्राई साइकिल मिल जाती और कमोड वाले शौचालय की व्यवस्था हो जाती तो उनका जीवन कुछ आसान बन जाता ।

कानपुर के घाटमपुर तहसील के भदरस गांव की ही 60 वर्षीया रामवती का भी कहना है कि वह पिछले 25 वर्षों से पैरों की सूजन (फाइलेरिया) से ग्रसित हैं, आपरेशन भी कराया। लेकिन, पैर की सूजन और बढ़ गई। पैर का वजन अब 20 किलोग्राम के करीब हो गया है। कमोड वाले शौचालय की व्यवस्था हो जाती तो उनका जीवन कुछ आसान बन जाता। इसी तरह की मांग लखनऊ के बख्शी तालाब के हरदुआरपुर निवासी 48 वर्षीया सुशीला रावत की भी है, जो करीब 20 वर्षों से फाइलेरिया से पीड़ित हैं। इसी गांव के 37 वर्षीय सोनपाल का कहना है कि वह पिछले 16 वर्षों से फाइलेरिया से पीड़ित हैं, जिस कारण कमाई का जरिया ठप हो गया है। यही स्थिति हमारे गांव के 20-25 अन्य लोगों की भी है। सरकार से मांग है कि उनके जीवनयापन के लिए कोई आर्थिक मदद की जाए या किसी योजना से जोड़कर उनकी कमाई की कोई व्यवस्था की जाए। दिव्यांगता प्रमाणपत्र न मिल पाने से इन लोगों में मायूसी भी है।

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दरअसल फाइलेरिया एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जो व्यक्ति को पूरी तरह से या फिर आंशिक रूप से अपंग अथवा दिव्यांग बना देती है। कई बार तो यह बीमारी इस कदर अपना असर दिखाती है कि व्यक्ति के लिए दैनिक क्रियाएं और रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है और पीड़ित व्यक्ति पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर हो जाता है। हर साल तीन दिसम्बर को विश्व दिव्यांग दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उदेश्य दिव्यांगों के प्रति लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना और उनको अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। इसी दिवस पर फाइलेरिया से दिव्यांग हुए लोगों की भी मांग है कि उन्हें भी अन्य श्रेणी के दिव्यांगों की तरह सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाए।

क्या है फाइलेरिया बीमारी

फाइलेरिया बीमारी क्यूलैक्स फैंटीगंस मादा मच्छर के जरिए फैलती है। जब यह मच्छर किसी फाइलेरिया से ग्रसित व्यक्ति को काटता है तो वह संक्रमित हो जाता है। फिर जब यह मच्छर किसी स्वस्थ्य व्यक्ति को काटता है तो फाइलेरिया के विषाणु रक्त के जरिए उसके शरीर में प्रवेश कर उसे भी फाइलेरिया से ग्रसित कर देते हैं। ज्यादातर संक्रमण अज्ञात या मौन रहते हैं और लंबे समय बाद इनका पता चल पाता है। इस बीमारी का कारगर इलाज नहीं है। सही रोकथाम ही इसका समाधान है।

फाइलेरिया के लक्षण
फाइलेरिया संक्रमित मच्छरों के काटने के बाद व्यक्ति को बहुत सामान्य लक्षण दिखते हैं, जैसे कि अचानक बुखार आना (आमतौर पर बुखार 2-3 दिन में ठीक हो जाता है), हाथ-पैरों में खुजली होना, एलर्जी और त्वचा की समस्या, इस्नोफीलिया, हाथों में सूजन, पैरों में सूजन के कारण पैर का बहुत मोटा हो जाना, अंडकोष में सूजन आदि। फाइलेरिया का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
हिन्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. रवि पचौरी का कहना है कि फाइलेरिया दुनिया की दूसरे नंबर की ऐसी बीमारी है जो बड़े पैमाने पर लोगों को दिव्यांग बना रही है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी की वजह से किसी की मौत भले ही न हो, लेकिन इस बीमारी से व्यक्ति मृत के समान हो जाता है। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया के उन्मूलन के लिए केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान पांच सालों तक लगातार फाइलेरिया से बचाव की दवा खानी चाहिए, जिससे कि फाइलेरिया जैसी घातक बीमारी से बचा जा सके।

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