Homeक्षेत्रीय भाषाजब प्रधानमंत्री बोले-मि आप लोगों थैं सेवा लगौण छू, गढ़वाली में कुशलक्षेम...

जब प्रधानमंत्री बोले-मि आप लोगों थैं सेवा लगौण छू, गढ़वाली में कुशलक्षेम पूछकर जीता पहाड़ की जनता का दिल

 

देहरादून। उत्तराखण्ड का, सभी दाणा सयाणौ, दीदी-भूलियौं, चच्ची-बोडियों और भै-बैणो। आप सबु थैं, म्यारू प्रणाम ! मिथै भरोसा छ, कि आप लोग कुशल मंगल होला ! मी आप लोगों थे सेवा लगौण छू, आप स्वीकार करा!

यानि उत्तराखण्ड के सभी बुजुर्गों-नौजवानों, बहनों, चाची-ताई और भाई-बहनों, सभी को मेरा प्रणाम। आप सभी मेरा प्रणाम स्वीकार करें और मुझे अपना आशीर्वाद दें। आप स्वीकार करें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कुछ इस तरह देवभूमि के लोगों से खुद को जोड़ते हुए गढ़वाली में अपना सम्बोधन शुरू किया। प्रधानमंत्री के इस सम्बोधन के साथ ही जनसभा का उत्साह देखने लायक था और लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया।

दरअसल प्रधानमंत्री मोदी जहां भी जाते हैं, वहां के रंग में खुद को रंग लेते हैं। स्थानीय बोली से लेकर स्थानीय पहनावे के जरिए खुद को लोगों से जोड़ना उनकी पुरानी शैली रही है। वह इससे पहले भी अपने भाषणों में भोजपुरी, बुन्देली, बंगाली सहित अन्य भाषाओं का इस्तेमाल कर चुके हैं। इस बार देवभूमि में उन्होंने गढ़वाली भाषा का प्रयोग कर यहां के लोगों को यह सन्देश दिया कि वह पहाड़ की मिट्टी और बोली से कितना जुड़ाव रखते हैं।

PM Narendra Modi inaugurates and lays foundation stone of multiple projects in Dehradun

उन्होंने उत्तराखण्ड के विकास के प्रति लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि आने वाले पांच वर्ष उत्तराखण्ड को रजत जयंती की तरफ ले जाने वाले हैं। ऐसा कोई लक्ष्य नहीं जो उत्तराखण्ड हासिल नहीं कर सकता। ऐसा कोई संकल्प नहीं जो इस देवभूमि में सिद्ध नहीं हो सकता। यहां के लोगों के पास मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के रूप में युवा नेतृत्व भी है, उनकी अनुभवी टीम भी है। वरिष्‍ठ नेताओं की बहुत बड़ी श्रृंखला है। 30-30 साल, 40-40 साल अनुभव से निकले हुए नेताओं की टीम है जो उत्तराखंड के उज्‍जवल भविष्‍य के लिए समर्पित है।

वहीं अपने भाषण के समापन में भी उन्होंने उत्तराखण्ड के प्रति अपने प्रेम का इजहार किया। उन्होंने कहा कि जो देशभर में बिखर रहे हैं, वो उत्तराखण्ड को निखार नहीं सकते हैं। आपके आशीर्वाद से विकास का ये डबल इंजन उत्तराखण्ड का तेज विकास करता रहेगा। उन्होंने इन पंक्तियों के साथ अपने भाषण का समापन किया—

जहां पवन बहे संकल्प लिए,

जहां पर्वत गर्व सिखाते हैं,

जहां ऊंचे नीचे सब रस्ते

बस भक्ति के सुर में गाते हैं

उस देव भूमि के ध्यान से ही

उस देव भूमि के ध्यान से ही

मैं सदा धन्य हो जाता हूं

है भाग्य मेरा,

सौभाग्य मेरा,

मैं तुमको शीश नवाता हूं।

मैं तुमको शीश नवाता हूं।

और धन्य धन्य हो जाता हूं।

तुम आंचल हो भारत मां का

जीवन की धूप में छांव हो तुम

बस छूने से ही तर जाएं

सबसे पवित्र वो धरा हो तुम

बस लिए समर्पण तन मन से

मैं देव भूमि में आता हूं

मैं देव भूमि में आता हूं

है भाग्य मेरा

सौभाग्य मेरा

मैं तुमको शीश नवाता हूं

मैं तुमको शीश नवाता हूं।

और धन्य धन्य हो जाता हूं।

जहां अंजुली में गंगा जल हो

जहां हर एक मन बस निश्छल हो

जहां गांव गांव में देश भक्त

जहां नारी में सच्चा बल हो

उस देवभूमि का आशीर्वाद लिए

मैं चलता जाता हूं

उस देवभूमि का आशीर्वाद लिए

मैं चलता जाता हूँ

है भाग्य मेरा

सौभाग्य मेरा

मैं तुमको शीश नवाता हूँ

मैं तुमको शीश नवाता हूँ

और धन्य धन्य हो जाता हूँ

मंडवे की रोटी

हुड़के की थाप

हर एक मन करता

शिवजी का जाप

ऋषि मुनियों की है

ये तपो भूमि

कितने वीरों की

ये जन्म भूमि

में देवभूमि में आता हूँ

मैं तुमको शीश नवाता हूँ

और धन्य धन्य हो जाता हूँ

मैं तुमको शीश नवाता हूँ

और धन्य धन्य हो जाता हूँ

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