Homeराज्यपुलिसिंग को राजनीति का शिकार नहीं होना चाहिए: अमित शाह

पुलिसिंग को राजनीति का शिकार नहीं होना चाहिए: अमित शाह

-तीन दिवसीय डीजीपी कांफ्रेंस का गृ​​ह मंत्री अमित शाह ने किया उद्घाटन, प्रधानमंत्री लखनऊ पहुंचे

कुंवर अशोक सिंह राजपूत

लखनऊ। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लखनऊ में 56वें पुलिस महानिदेशक, महानिरीक्षक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों का बेहतर तालमेल जरूरी है। पुलिसिंग और राजनीति अलग-अलग है। पुलिसिंग को राजनीति का शिकार नहीं होना चाहिए। पुलिस को अच्छे काम का इनाम मिलना चाहिए तो गलत काम करने वालों को सजा भी मिलनी चाहिए। उन्होंने जेलों को फेल प्रूफ और फुल प्रूफ होना चाहिए। उन्होंने केंद्र व राज्यों की एजेंसियों में बेहतर तालमेल पर जोर दिया।

तटीय सुरक्षा, वामपंथी उग्रवाद, नारकोटिक्स, साइबर क्राइम और सीमा प्रबंधन जैसे सुरक्षा संबंधित विषयों पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर देने के साथ क्रेंदीय गृह मंत्री ने राज्यों में प्रभावी पुलिस व्यवस्था के लिए पुलिस थानों और बीट स्तर के सुधारों पर जोर दिया। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूपी के महोबा,झांसी के रक्षा, सोलर व जल-प्रबन्धन,सिंचाई से संबन्धित सरकारी कार्यक्रम समाप्त करने के बाद देर शाम पुलिस-डीजी सम्मेलन कार्यक्रम में दो दिन शामिल रहने के लिये लखनऊ पहुंच गए हैं।

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केंद्रीय गृह मंत्री ने कोविड महामारी के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा निभाई गई भूमिका और उनके त्याग की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री के निर्देशों के अनुसार हाइब्रिड तरीके से इस सम्मेलन के आयोजन की सराहना की और कहा कि इससे निचले स्तर के अधिकारियों तक सूचनाओं का बेहतर प्रसार हो सकेगा।

उन्होंने राज्यों के पुलिस महानिदेशकों व आईपीएस अफसर प्रतिनिधियों से कहा कि वे सम्मेलन में दिए गए सुझावों पर समयबद्ध तरीके से अमल करें। तीन दिनों के इस सम्मेलन को हाइब्रिड फारमेट में आयोजित किया जा रहा है।

दोपहर बाद लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में इंटेलीजेंस ब्यूरो के अधिकारियों को सराहनीय सेवा के लिए गृह मंत्री शाह द्वारा पुलिस मेडल प्रदान किए। इसके अलावा देश के तीन सर्वश्रेष्ठ पुलिस थानों को भी ट्राफी वितरित की। इसमें दिल्ली का सदर बाजार, ओडिशा का गंगापुर और हरियाणा के भटटू कलां रहे। सिविल व विभिन्न ऐजेनसियों के सीनियर रेंक अधिकारियों के साथ डीजीपी कार्यालय में हाईब्रिड मोड में सम्मेलन के अन्य कार्यक्रम शुरू हुए।

इसके तहत सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक और केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों के प्रमुख लखनऊ पुलिस मुख्यालय से इस सम्मेलन में शामिल हुए। इसके अलावा लगभग 350 अन्य वरिष्ठ अधिकारी विभिन्न राज्यों में स्थित आईबी कार्यालयों से वर्चुअल प्लैटफार्म के जरिए इस सम्मेलन में शामिल हुए।

राज्य के सीनियर अफसर के अनुसार 20 नवंबर को सुबह पीएम डीजीपी मुख्यालय पहुंचकर डीजीपी सम्मेलन में हिस्सा लेने के अलावा डीजीपी मुख्यालय में आयोजित अधिकारियों के साथ भोज में भी प्रधानमंत्री हिस्सा लेंगे। शनिवार के सम्मेलन शामिल रहने के बाद मोदी राजभवन लौट आएंगे और सम्मेलन के तीसरे दिन सुबह डीजीपी सम्मेलन के समापन समारोह में उपस्थिति के बाद वापस दिल्ली चले जाएंगे।

सम्मेलन के पहले दिन के विषय व चर्चाओं की जानकारी देते हुए गृह विभाग के अफसर ने बताया सम्मेलन के दौरान आंतरिक सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें जेल सुधार कट्टरवाद से मिल रही चुनौतियां तथा पुलिस प्रशिक्षण जैसे विषय शामिल थे। इस मौके पर नेशनल इंटेलीजेंस ग्रिड की ओर से भी एक प्रस्तुतिकरण दिया। इस प्रस्तुतीकरण का मकसद आने वाले दिनों की चुनौतियों को उजागर करना और उनसे निपटने के लिए भावी दिशा निर्देश तय करना था।

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि 2014 के बाद से डीजीपी सम्मेलन के प्रारूप में कई बदलाव किए गए हैं। यह सम्मेलन विभिन्न राज्यों में आयोजित किए जा रहे हैं और हर सम्मेलन में प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री पूरी दिलचस्पी लेते हैं। सम्मेलन की तैयारी के दौरान आंतरिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए विभिन्न राज्यों के पुलिस महानिदेशकों को शामिल किया जाता है और कई एक्शन कोर ग्रुप गठित किए जाते हैं। इस बार लखनऊ सम्मेलन में चर्चा किए जाने वाले समसामयिक सुरक्षा मुद्दों पर राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों के 200 से अधिक विभिन्न वरिष्ठ अधिकारियों से उनके विचार मांगे गए।

 

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