Homeदेशराष्ट्रपति कोविंद बोले-सैनिक स्कूल यानी ना केवल शिक्षित बल्कि अनुशासित नागरिक

राष्ट्रपति कोविंद बोले-सैनिक स्कूल यानी ना केवल शिक्षित बल्कि अनुशासित नागरिक

 

लखनऊ। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शुक्रवार को कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल के हीरक जयन्ती वर्ष के समापन समारोह में डाॅ. सम्पूर्णानन्द की प्रतिमा का अनावरण और उनके नाम से बने प्रेक्षागृह का लोकार्पण किया। राष्ट्रपति ने सैनिक स्कूल की क्षमता दोगुनी किए जाने की परियोजना एवं बालिका छात्रावास का शिलान्यास तथा डाक टिकट का विमोचन भी किया। इस मौके पर राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे।

राष्ट्रपति ने अपने सम्बोधन में कहा कि डाॅ. सम्पूर्णानन्द देश के पहले मुख्यमंत्री हुए हैं जिन्होंने सैनिक स्कूल की स्थापना करने के बारे में सोचा। उन्होंने कहा कि मेरी समझ के मुताबिक उन्होंने यह जरूर अनुभव किया होगा कि यदि देश का सफलतापूर्वक संचालन करना है, शासन और प्रशासन की अच्छी दिशा देनी है तो उसके लिए अनुशासन जरूरी है। शायद यही बात उनके मस्तिष्क में रही होगी कि जब तक अनुशासित नागरिक नहीं होगा तब तक हम देश और प्रदेश को विकास के मार्ग पर कैसे आगे ले जा सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि सैनिक स्कूल अर्थात ना केवल शिक्षित बल्कि अनुशासित नागरिक। उन्होंने कहा कि अनुशासित नागरिक की जो कल्पना डाॅ. सम्पूर्णानन्द के मस्तिष्क में रही होगी, उसके लिए आज उनकी स्मृति को मैं नमन करता हूं। राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज शिक्षा के क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ रहा है। इसके लिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित सरकार से जुड़े सभी लोगों के कार्य सराहनीय है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में गोरखपुर में एक सैनिक स्कूल का शिलान्यास किया है साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश में 16 नए सैनिक स्कूल की स्थापना करने के लिए केन्द्र सरकार को अनुरोध किया है। सैनिक स्कूलों से जुड़े लोग यह जानते हैं कि वर्ष 2021—22 के बजट में देश में 100 सैनिक स्कूल की स्थापना प्रस्तावित है।

शिक्षा का मतलब केवल पुस्कतों का ज्ञान नहीं

इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षा का मतलब केवल पुस्कतों का ज्ञान नहीं हो सकता बल्कि हम नागरिक के अंदर अधिक से अधिक सकारात्मकता पैदा कर सकें, कैसे हम हर नागरिक को रचनात्मक बना सकें। मुझे लगता है कि सैनिक स्कूल इसका सबसे अच्छा माध्यम हैं। यह सैनिक स्कूल पहला सैनिक स्कूल है जिसने 2018 में तय किया था कि इसमें हम बालिकाओं के प्रवेश को अनिवार्य करेंगे। जिससे आधी आबादी अपने आप को उपेक्षित महसूस न करे। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत सरकार का आभार जताया कि अब सैनिक स्कूलों में बालिकाओं के प्रवेश की अनुमति है।

देश का पहला सैनिक स्कूल होने का गौरव

राजधानी स्थित कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल देश का पहला सैनिक स्कूल है। इसका अनुकरण कर रक्षा मंत्रालय ने देश के विभिन्न स्थानों पर अन्य सैनिक स्कूलों की स्थापना की है। बालिकाओं को सैनिक स्कूलों में प्रवेश देने के लिए उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल को देश का पहला सैनिक स्कूल होने का गौरव प्राप्त है। साथ ही, इस विद्यालय के भूतपूर्व छात्र कैडेट स्व. कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित किया गया।

4,000 छात्र सैनिकों को किया जा चुका है प्रशिक्षित

विगत 60 वर्षों में इस विद्यालय द्वारा विभिन्न यादगार उपलब्धियां अर्जित की गई हैं। विद्यालय ने अपनी स्थापना से अभी तक लगभग 4,000 छात्र सैनिकों को प्रशिक्षित किया है, जिनमें से 1,000 से अधिक छात्र भारतीय सशस्त्र सेनाओं में अधिकारी बनकर देश की सेवा में संलग्न और सेना के उच्च पदों पर सुशोभित हैं। इसके अतिरिक्त यहां के छात्र प्रशासनिक अधिकारी, कुशल चिकित्सक, श्रेष्ठ न्यायविद, उद्योगपति, राजनेता इत्यादि के रूप में विद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं।

अब सुलतानपुर का नाम कुश भवनपुर करने की तैयारी में योगी सरकार

उत्तर प्रदेश की जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति के दृष्टिगत उप्र सैनिक स्कूल, लखनऊ की क्षमता को दोगुना किए जाने के सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्णय किया है, जिससे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को सैनिक स्कूल में शिक्षा प्राप्त करने का उचित अवसर प्राप्त हो सके। उप्र सैनिक स्कूल सोसाइटी के अन्तर्गत जनपद गोरखपुर में एक और सैनिक स्कूल की स्थापना की जा रही है।

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