Homeधर्मउत्तराखण्ड: समृद्ध लोकसंस्कृति कु प्रतीक लोकपर्व 'इगास' पर अब छुट्टी रालि

उत्तराखण्ड: समृद्ध लोकसंस्कृति कु प्रतीक लोकपर्व ‘इगास’ पर अब छुट्टी रालि

अपने रिवाज, अपनी बोली, अपने पर्व अगली पीढ़ी तक पहुंचते रहे, इसलिए चलिए इस त्योहार अपने गांव-अपने उत्तराखण्ड

देहरादून। देवभूमि के लोकपर्व इगास यानी बूढ़ी दिवाली पर राजकीय अवकाश घोषित करके मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा दांव चला है। मुख्यमंत्री के इस निर्णय को सत्तापक्ष जहां प्रदेश की जन भावनाओं का सम्मान बताने में जुटा है। वहीं विपक्ष ने इसे हड़बड़ी में किया फैसला करार दिया है। ऐसे में चुनाव से पहले लोक पर्व के नाम पर सियासत तेज हो गई है।

दरअसल उत्तराखण्ड के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब किसी सरकार ने लोकपर्व इगास को विशेष महत्व देते हुए राजकीय अवकाश घोषित किया है। भाजपा नेताओं के मुताबिक धामी सरकार के इस फैसले के बाद भविष्य में हर साल इगास पर छुट्टी का आदेश जारी नहीं करना पड़ेगा। साथ ही उनका यह फैसला लोक संस्कृति, परम्पराओं के संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में ऐतिहासिक माना जायेगा।

U.P. to help govt’s commitment to fulfilling needs of defence industry, says Rajnath Singh

मुख्यमंत्री ने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए 14 नवम्बर यानी रविवार को पड़ रहे इगास पर्व की छुट्टी अगले दिन 15 नवम्बर को सोमवार के दिन स्वीकृत की है, ताकि लोग अपने पैतृक गांव जाकर उल्लास के साथ बूढ़ी दिवाली मना सकें। उन्होंने इस लोक पर्व को व्यापक स्तर पर उल्लास के साथ मानने का आह्वान भी किया है।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्डी में इसकी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड की समृद्ध लोकसंस्कृति कु प्रतीक लोकपर्व ‘इगास’ पर अब छुट्टी रालि। हमारू उद्देश्य च कि हम सब्बि ये त्यौहार तै बड़ा धूमधाम सै मनौ, अर हमारि नई पीढ़ी भी हमारा पारम्परिक त्यौहारों से जुणि रौ।’

वहीं कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसे कोरी घोषणा कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले थोड़ी राहत की आशा में विकास के नाम पर हड़बड़ी में 14 तारीख को छुट्टी घोषित कर दी थी, फिर इसे बदलकर अगले दिन किया गया। हालांकि जनता ने भी सरकार की छुट्टी करने का इरादा कर लिया है, क्योंकि महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है। बेरोजगारी ने परिवारों को चिंता की गर्त में डाल दिया है।

इससे पहले आम आदमी पार्टी के नेता और मुख्यमंत्री पद का चेहरा कर्नल (सेवानिवृत) अजय कोठियाल ने इस पर छुट्टी की मांग की थी। अब पार्टी नेता इसे उनके दबाव में सरकार का मजबूरी में किया फैसला साबित करने में जुटे हैं।

उधर केन्द्रीय रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट ने इगास पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा को लेकर मुख्यमंत्री धामी को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह बड़ा फैसला किया गया है। हम लोग बूढ़ी दिवाली मनाते हैं। लेकिन, नई पीढ़ी कहीं न कहीं भूलती जा रही थी। आज फिर संस्कृति से जुड़ने का हमें मौका मिला है। रक्षा राज्य मंत्री ने स्वयं उत्तराखंड में रहकर धूमधाम से बूढ़ी दिवाली मनाने की बात कही है।

वहीं राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी ने इगास पर छुट्टी घोषित करने पर मुख्यमंत्री धामी का आभार जताया है। बलूनी पिछले कुछ वर्षों से गांवों में जाकर इगास मनाने की मुहिम चला रहे हैं। इस बार वह देवभूमि में अपने पैतृक गांव जनपद पौड़ी के नकोट जाकर इस पर्व को मनाएंगे। वहीं सोशल मीडिया में भी देवभूमि से जुड़े लोग मुख्यमंत्री धामी की दिल खोलकर तारीफ कर रहे हैं।

दरअसल दिवाली के 11 दिन बाद पहाड़ में एक और दिवाली मनाई जाती है, जिसे इगास कहा जाता है। इस दिन सुबह मीठे पकवान बनाए जाते हैं और शाम को भैलो जलाकर देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। पूजा-अर्चना के बाद ढोल-दमाऊं की थाप पर भैलो यानी भीमल या चीड़ की लकड़ी का गट्ठर जलाकर घुमाया जाता है और नृत्य किया जाता है।

एक पौराणिक मान्यता के अनुसार करीब 400 साल पहले बीर भड़ माधो सिंह भंडारी के नेतृत्व में टिहरी, उत्तरकाशी, जौनसार और श्रीनगर समेत अन्य क्षेत्रों से योद्धाओं को बुलाकर सेना तैयार की गई थी और तिब्बत पर हमला बोलते हुए तिब्बत सीमा पर मुनारें गाड़ दी थी। इस दौरान बर्फ से पूरे रास्ते बंद हो गए। कहा जाता है कि पूरे गढ़वाल में उस साल दिवाली नहीं मनाई गई। लेकिन, दीवाली के 11 दिन बाद जब माधो सिंह युद्ध जीत कर वापस गढ़वाल पहुंचे तब पूरे इलाक के लोगों ने भव्य तरीके से दीवाली मनाई, तब से ही गढ़वाल में इसे कार्तिक माह की एकादशी यानी इगास बग्वाल के रूप में मनाया जाता है।

एक अन्य मान्यता के मुताबिक भगवान राम के लंका विजय कर अयोध्या पहुंचने की सूचना पहाड़ में 11 दिन बाद मिली थी। इसीलिए दिवाली के 11 दिन बाद इगास पर्व यानी बूढ़ी दिवाली मनाया जाता है।

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