Homeदुनियाआतंकवाद के साथ शांति और समृद्धि नहीं रह सकती: राजनाथ

आतंकवाद के साथ शांति और समृद्धि नहीं रह सकती: राजनाथ

 

-रक्षा मंत्री ने ताजिकिस्तान के दुशान्बे में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक को किया संबोधित

-एससीओ ने 20 साल पूरे किए, एक सुरक्षित क्षेत्र बनाना साझा जिम्मेदारी

-भारत ने अफगानिस्तान में 500 परियोजनाएं पूरी की, 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता दी

-94 देशों और संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षकों को टीके की 6.6 करोड़ खुराक कराई उपलब्ध

दुशांबे। ताजिकिस्तान के दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा, “आतंकवाद का कोई भी कृत्य और इस तरह के कृत्यों को समर्थन, जिसमें सीमा पार आतंकवाद भी शामिल है, किसी के द्वारा, कहीं भी और किसी भी मकसद से किया जाना मानवता के खिलाफ अपराध है।” रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों से लड़ने के लिए भारत के संकल्प की फिर से पुष्टि की।

राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा, “भारत एससीओ के भीतर सुरक्षा क्षेत्र में विश्वास को मजबूत करने के साथ-साथ समानता, आपसी सम्मानऔर समझ के आधार पर द्विपक्षीय रूप से एससीओ भागीदारों के साथ संबंधों को मजबूत करने को उच्च प्राथमिकता देता है।” उन्होंने कहा कि आज चुनौती केवल अवधारणाओं और मानदंडों की नहीं है, बल्कि उनको ईमानदारी से अमलीजामा पहनाने की भी है।

रक्षा मंत्री ने एससीओ वजूद के 20 साल सफलतापूर्वक पूरे होने पर सदस्य-देशों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हालांकि भारत 2017 में संगठन में शामिल हुआ लेकिन ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध और भौगोलिक संपर्क भारत कोएससीओ से अविभाज्य बनाते हैं।

क्षेत्रीय समूह के महत्व पर जोर देते हुए, राजनाथ सिंह ने कहा, “एससीओ देशों में एक साथ मिलकर हमारी पृथ्वी की लगभग आधी मानव आबादी रहती है। इसलिए हमारे पास एक सुरक्षित और स्थिर क्षेत्र बनाने के लिए सामूहिक हित हैं जो कि हमारे लोगों और आने वाली पीढ़ियों के मानव विकास सूचकांकों की प्रगति और सुधार में योगदान देता है। उन्होंने कहा कि भारत इसी भावना से प्रेरित होकर अफगानिस्तान के लोगों की मदद करता है, जो दशकों से हिंसा और तबाही का सामना कर रहा है। अब तक भारत ने अफगानिस्तान में 500 परियोजनाएं पूरी की हैं और 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर की कुल विकास सहायता के साथ कुछ और परियोजनाओं को जारी रखे है।

भारत की भू-रणनीतिक स्थिति के बारे में बताते हुए जो इसको यूरेशियन ज़मीन की शक्ति और साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक हितधारक बनाता है, रक्षा मंत्री ने कहा, “इसलिए हमारा इरादा और आकांक्षाएं पूरे क्षेत्र की समृद्धि और विकास की ओर केंद्रित हैं। हम क्षेत्र में सभी केलिए सुरक्षा और विकास की हमारी राष्ट्रीय नीति के माध्यम से इस इरादे की पुष्टि करें जिसे आमतौर पर संक्षिप्त नाम ‘सागर’ से जाना जाता है।” उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षा और स्थिरता देशों की प्रगति और आर्थिक विकासके लिए अनुकूल वातावरण बनाने के सबसे आवश्यक घटक हैं ।

एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित और स्थिर क्षेत्र बनाने और बनाए हुएरखने में मदद करने के लिए एससीओ ढांचे के भीतर काम करने के लिए भारत के संकल्प को दोहराते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, “भारत एससीओ सदस्य-देशों के साथ साझेदारी करने की प्रतिबद्धताओं को दोहराता है ताकि व्यक्तिगत राष्ट्रीय संवेदनशीलता का सम्मान करने वाली संयुक्त संस्थागत क्षमता विकसित की जा सके और इसके बीच भी लोगों, समाजों और देशों के बीच संपर्क, सहयोग और कनेक्टिविटी की भावना पैदा हो पाए।”

कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा, “इसने राष्ट्रों, नागरिक समाजों तथा नागरिकों को कई तरह से प्रभावित किया है। यह इस बात की चेतावनी का संकेत है कि महामारी, जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, जल सुरक्षा और संबंधित सामाजिक व्यवधान जैसी गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जगत को कैसे प्रभावित कर सकती हैं।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि सशस्त्र बलों और रक्षा अनुसंधानएवं विकास संगठन ने कोविड-19 के खिलाफ प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । उन्होंने कहा, “वैश्विक महामारी के दौरान भारत दुनिया भरके देशों को सहायता प्रदान करने में सक्षम था। इसमें 90 देशों को टीकों की 6.6 करोड़ खुराक, 150 देशों को दवा, चिकित्सा सामग्रियों और उपकरणों केसाथ सहायता शामिल है । हम विदेशियों सहित 70 लाख से अधिक फंसे हुए लोगोंको स्थानांतरित करने के लिए बड़े पैमाने पर ज्यादातर हवाई मार्ग से लेकिन हिंद महासागर में हमारे जहाजों द्वारा भी संचालित ‘वंदे भारत’ सेवा का उल्लेख कर सकते हैं।

रक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया, “भारत अगस्त और 2021 के अंत के बीच टीकों की 250 करोड़ से अधिक खुराक का उत्पादन करने की योजना बना रहा है। हम कम से कम 90 करोड़ वयस्क भारतीयों का टीकाकरण करने और अन्य मित्रदेशों को वैक्सीन के साथ मदद करने के प्रति दृढ़ हैं।”

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