HomeLifestyleहेल्थपाचन-कोलेस्ट्रॉल समस्या से निजात के लिए कारगर है ये उपाय

पाचन-कोलेस्ट्रॉल समस्या से निजात के लिए कारगर है ये उपाय

• स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे अपने दैनिक आहार में शामिल करने की देते हैं सलाह
• फाइबर की मात्रा अपने आहार में बढ़ाने से पहले शरीर में पानी की कमी न होने की भी हिदायत

लखनऊ। अगर पाचन सम्बन्धी समस्या है, कोलेस्ट्रॉल का स्तर बिगड़ा हुआ है या फिर वजन कम करना चाहते हैं तो इसके लिए उपयोगी विकल्प है फाइबर युक्त खाना। आहार में रेशे युक्त पदार्थों को शामिल करना बहुत महत्वपूर्ण है। इससे जीवन शैली से सम्बन्धित कई बीमारियों से भी बचाव होगा। फाइबर यानि रेशेदार पदार्थ शरीर के लिए कई तरह से लाभकारी होते हैं और पोषक भी।

संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) की डायटीशियन प्रीति यादव के मुताबिक फाइबर युक्त खाना हमें शाकाहारी भोजन से मिलता है। ये आंत में पानी को सोखते हैं और कई तरह के रोगों से हमारी रक्षा करते हैं। फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं। जैसे अधिक फाइबर युक्त खाना खाने से बड़ी आंत से भोजन जल्दी आगे चला जाता है और पाचन प्रक्रिया सही रहती है।

फाइबर युक्त खाने के लाभ
-पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायक
-कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक
-ब्लड में शुगर के लेवल को कंट्रोल करने में सहायक
-हृदय, कैंसर आदि रोगों से बचाने में सहयोगी

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फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ
अलसी, बादाम, अनार, सूखा अंजीर, गेहूं का चोकर, बाजरा, राई का आटा, राजमा, दाल, गाजर और चुकंदर में प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे अपने दैनिक आहार में शामिल करने को कहते हैं। फाइबर की मात्रा अपने आहार में बढ़ाने से पहले यह ध्यान रखना चाहिए कि शरीर में पानी की कमी न हो। फाइबर पानी को खींचता है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसलिए रेशेयुक्त भोजन का सेवन करने के साथ ही पानी की मात्रा बढ़ाना आवश्यक होता है।

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क्या है फाइबर
फाइबर कार्बोहाइड्रेट का एक ऐसा प्रकार है जो प्रायः पौधों की पत्तियों, तने और जड़ों में पाया जाता है। इसके अलावा चोकर, साबुत अनाजों और बींस प्रजाति की सब्जियों में भी फाइबर मौजूद होता है। मूलतः फाइबर दो प्रकार के होते हैं जो शरीर के लिए अलग तरह से काम करते हैं। पहले तरह का अघुलनशील फाइबर चोकर, मूंगफली, सूखे मेवों और पत्तेदार हरी सब्जियों में पाया जाता है। इसकी बनावट मोटी और खुरदरी होती, इसलिए यह पानी में नहीं घुल पाता और पाचन क्रिया के अंत तक साबुत रहता है। यह उत्सर्जन प्रक्रिया द्वारा शरीर से बाहर निकल जाता है। वहीं घुलनशील फाइबर कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है। हृदय रोग से बचाव करता है और रक्त में शर्करा की मात्रा को भी नियंत्रित रखता है। दलिया, जौ, मटर, सेम, मसूर, बीज, नींबू के फल और सेब में घुलनशील फाइबर पाया जाता है।

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बच्चे के खाने में 15-30 ग्राम हर दिन हो फाइबर
डायटीशियन प्रीति बताती हैं कि माता-पिता को इस बात का ध्यान देना चाहिए कि बच्चे को लगभग 15-30 ग्राम हर दिन फाइबर युक्त खाना मिले। इसके साथ ही आवश्यक है कि फाइबर के लिए सप्लिमेंट लेने के बजाय अपने आहार में साबुत अनाज को शामिल किया जाय। सुबह के नाश्ते में फइबरयुक्त पादर्थ लें। इससे आपका पाचन बेहतर बनेगा।

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