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उप्र विधानसभा को सोमवार को मिलेगा नया उपाध्यक्ष, भाजपा के नितिन अग्रवाल व सपा के नरेन्द्र वर्मा का नामांकन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा को सोमवार को नया उपाध्यक्ष मिल जाएगा। इसके लिए सोमवार को विधानसभा के विशेष सत्र में मतदान होगा। रविवार को इसके लिए भाजपा की ओर से हरदोई से विधायक नितिन अग्रवाल और समाजवादी पार्टी से सीतापुर के महमूदाबाद से विधायक नरेन्द्र सिंह वर्मा ने नामांकन पत्र दाखिल किया है।

सत्तारूढ़ दल ने उपाध्यक्ष पद के लिए विधायक नितिन अग्रवाल को मैदान में उतारा है। जबकि प्रमुख विपक्षी दल ने नितिन को चुनौती देने के लिए सीतापुर की महबूदाबाद विधानसभा से छह बार के अपने विधायक पूर्व मंत्री नरेन्द्र वर्मा का नामांकन कराया है।

नरेन्द्र वर्मा ने विधान भवन के राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन सभागार में विधानसभा उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन किया। उन्होंने नामांकन पत्र प्रमुख सचिव विधान सभा प्रदीप कुमार दुबे के समक्ष प्रस्तुत किया। इस दौरान नेता विरोधी दल रामगोविन्द चौधरी, सपा के प्रदेश अध्यक्ष व विधान परिषद सदस्य नरेश चंद्र उत्तम सहित पार्टी विधायक मौजूद थे। खास बात है कि नरेन्द्र सिंह वर्मा के साथ नामांकन के दौरान बसपा के छह बागी विधायक भी रहे।

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नामांकन करने के बाद नरेन्द्र सिंह वर्मा ने कहा कि संसदीय परंपराओं के अनुरूप विधानसभा उपाध्यक्ष का पद सदन में सबसे बड़े विपक्षी दल का होता है। मेरी जानकारी में प्रदेश में विधानसभा उपाध्यक्ष पद के लिए आज तक चुनाव नहीं हुआ। उन्होंने नितिन अग्रवाल को अपना छोटा भाई बताते हुए कहा कि अब वह भाजपा में हैं। सत्ता पक्ष रोज नई नजीर पेश कर रहा है, संवैधानिक परंपराओं और मर्यादाओं को तोड़ मरोड़ रहा है। नरेन्द्र सिंह वर्मा ने उम्मीद जतायी कि यदि चुनाव की नौबत आती है तो विधानसभा के सदस्य अंतरात्मा की आवाज पर उन्हें वोट देंगे।

हालांकि भाजपा का पूर्ण बहुमत होने के कारण हरदोई सदर से विधायक नितिन अग्रवाल का उत्तर प्रदेश विधानसभा उपाध्यक्ष बनना तय है। इस तरह नितिन अग्रवाल को कैबिनेट मंत्री का दर्ज मिलेगा। मार्च 2017 में समाजवादी पार्टी के टिकट से तीसरी बार चुनाव जीतने वाले नितिन अग्रवाल पिता नरेश अग्रवाल के साथ मार्च 2018 में भाजपा में शामिल हो गए थे। उन पर राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग के भी आरोप हैं। इसी आधार पर उनकी विधानसभा से सदस्यता खत्म कराने के लिए सपा विधानमंडल दल के नेता राम गोविंद चौधरी ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दाखिल की थी। लेकिन, यह याचिका बाद में खारिज हो गई थी।

 

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