Homeराज्यउत्तराखण्ड जनजाति महोत्सव: इको फ्रेंडली उत्पाद लोगों को आ रहे खासे पसन्द

उत्तराखण्ड जनजाति महोत्सव: इको फ्रेंडली उत्पाद लोगों को आ रहे खासे पसन्द

-मुख्यमंत्री धामी बोले जनजातियां पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रारम्भ से सजग

-जनजाति क्षेत्रों में शिक्षा की प्रभावी व्यवस्था के लिये खोले जाएंगे 450 स्कूल:अर्जुन मुण्डा

देहरादून। राजधानी में आयोजित तीन दिवसीय उत्तराखण्ड जनजाति महोत्सव आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। खासतौर पर यहां जनजाति क्षेत्रों के विभिन्न उत्पाद लोगों को बेहद पसन्द आ रहे हैं। इको फ्रेंडली होने के साथ इनकी गुणवत्ता विश्वस्तरीय है, इस वजह से इनकी मांग और बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुण्डा के साथ इसका शुभारम्भ करते हुए कहा कि आज देश दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंतन मनन हो रहा है। लेकिन, हमारी जनजातियां प्रारम्भ से ही पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान देती रही हैं। हमारी जनजातीय समूहों की शुरुआत से ही जड़ी-बूटियों को लेकर ज्ञान, उनकी विशेष पहचान रही है।

उन्होंने कहा कि रामायण काल में जब भगवान श्रीराम अपने चौदह वर्ष के वनवास को काट रहे थे तब ये वनवासी ही थे जो आगे बढ़कर भगवान श्रीराम की सहायता करने आए थे। उन्ही के सहयोग से भगवान राम ने महाबली रावण की विशाल सेना को परास्त कर लंका पर विजय प्राप्त की थी। महाभारत काल में भी जनजातियों के बारे में विशेष उल्लेख मिलता है।

इस मौके पर केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुण्डा ने कहा कि जनजाति कल्याण से सम्बन्धित जो भी प्रस्ताव मुख्यमंत्री भेजेंगे, उन पर जल्द निर्णय किये जायेंगे। उन्होंने राज्य के एकलव्य स्कूलों और जनजाति शोध संस्थान की व्यवस्थाओं की भी सराहना की।

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उन्होंने कहा कि देश में जनजाति क्षेत्रों में शिक्षा की प्रभावी व्यवस्था के लिये 450 स्कूल खोले जायेंगे जिसके लिये 30 हजार करोड़ की व्यवस्था की गई है। केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास राज्यों के सहयोग से जनजाति समुदाय को देश की मुख्य धारा से जोड़ना है। उन्होंने जनजाति के क्षेत्रों का माइक्रो प्लान बनाने तथा उन्हें आजीविका मिशन कार्यक्रमों से जोड़ने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में जहां 5 जनजातियां हैं वहीं झारखण्ड में 32 जनजाति समुदाय हैं।

इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने केन्द्रीय मंत्री से पिथौरागढ़ और चमोली में जनजातीय छात्रों के लिए दो नए एकलव्य आवासीय विद्यालय, विभागीय विद्यालयों में पढ़ रहे जनजाति के 5 हजार छात्र-छात्राओं को टेबलेट उपलब्ध कराने और राज्य में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जीवन परिचय पर आधारित संग्रहालय की स्थापना करने का अनुरोध किया।

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