Homeदुनियाभारत और चीन के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलेगी!

भारत और चीन के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलेगी!

कुंवर अशोक सिंह राजपूत

तीन सालों से भारत चीन के बीच आपसी सम्बन्धों में जारी तनातनी और ठहरे संवाद को फिर शुरू किया जा सकता है। अटकले लगायी जा रही हैं कि लम्बे समय से जारी गतिरोध को खत्म करने के लिये भारत चीन के डिप्लोमेटिक चैनल अप्रत्यक्ष के बजाय प्रत्यक्ष बातचीत के दौर को वर्ष 2022 के पूर्वार्ध से मध्य में शुरू कर सकते हैं। हालांकि इस सम्बन्ध में दिल्ली में साऊथ-ब्लॉक की ओर से अभी कोई खुलासा नहीं किया जा रहा है। फिर भी दोनों देशों के डिप्लोमेट की तरफ से आधिकारिक बातचीत का क्रम चालू होने के संकेत चीन में नए भारतीय राजदूत के नाम की साऊथ-ब्लॉक के द्वारा आगामी दिनों में घोषणा हो जाने के बाद सम्भवतः मिल सकता है।

चीन में भारत के राजदूत विक्रम मिसरी के फेयरवेल वर्चुअल बैठक में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भी ऐसी ही उम्मीद जताई है कि इससे दोनों तरफ के बॉर्डर पर तनाव में कमी आएगी। वांग ने बैठक में कहा है कि हमें आपसी समझ बनानी चाहिए। गलत फैसला नहीं करना चाहिए। हमें दीर्घकालिक सोच रखने की जरूरत है और अस्थायी चीजों से विचलित नहीं होना चाहिए। भारत और चीन को एक-दूसरे को सफल होने में मदद करनी चाहिए और दोनों को एक-दूसरे को थका नहीं देना चाहिए।

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विदेश मामलों के जानकारों का इसके प्रति साफ कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर का प्रभाव थमे रुके निर्मूल हो जाने के बाद भारत-चीन इन दोनों देशों के बीच बातचीत होने की स्थिति को अब और टाला नहीं जायेगा। इसके संकेत रूस के राष्ट्रपति पुतिन द्वारा चीन के दौरे को आगे सरका कर अपने रक्षा मंत्री के साथ पहले दिल्ली पहुंच जाना और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से रक्षा, अंतरिक्ष सहित दूसरे अहम विषयों पर बातचीत व समझौते करने के पीछे भी चीन भारत के बीच सरकार के स्तर पर दि्पक्षीय-बातचीत के लिये विश्वास आशा जगाना प्रमुख रहा है। दरअसल चीन के विभिन्न प्रान्तों में फैले उद्योग आईटी उत्पादन और बाजार के क्षेत्र की गतिविधियों के लॉकडाउन बाद पूर्व की तरह संचालन के लिये जरूरी मैन-पावर, व्यवसायी और उद्योगपति तभी आवागमन कर सकेंगे जब दोनों देशों के विदेश व व्यापार मंत्रालय के बीच एक-दो चक्र की बातचीत हो जाए। दोनों पक्षों के सरकार व्यवसाईयों के साथ जनता-नागरिक के मध्य आपसी विश्वास कायम करने के लिये ये बेहद जरूरी है। वैसे भी साल 2019-20 के बीच भारत का चीन को औसत सालाना निर्यात करीब 13 अरब डॉलर का रहा है। इसी तरह इस बीच भारत का चीन से औसत आयात 66 अरब डॉलर का रहा जो अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात से आयात किए गए सामानों को मिलाकर भी ज्यादा था। जबकि देश की सुरक्षा की द्दष्टि से भारत चीन से आयात को लगातार कम करके भारत के मैनुफैक्चरिंग को बढ़ाने के पक्षधर हैं।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट बताती है कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारतीय राजनयिक के विदाई भाषण में कहा है कि जब हम भरोसा कायम कर सकते हैं तो हिमालय भी हमारी दोस्ती को नहीं रोक सकता है। लेकिन, एक बार यकीन खो जाने के बाद पहाड़ का एक सिरा भी हमारे साथ आने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा है कि चीन और भारत को एक-दूसरे को गलत ठहराने के बजाय आपसी समझ को बढ़ाना चाहिए। बैठक में चीन स्थित भारतीय राजनयिक मिसरी ने भी कहा कि पिछले साल से कुछ चुनौतियों ने रिश्ते में विशाल अवसरों को खत्म कर दिया था। लेकिन, उन्होंने उम्मीद जताई है कि दोनों देश मौजूदा मुश्किलों को दूर करते हुए सम्बन्धों को सकारात्मक दिशा में आगे ले जाएंगे। चीन में तैनात भारतीय राजदूत विक्रम मिसरी का कार्यकाल दिसम्बर में खत्म हो रहा है और भारत ने अब तक चीन में नए राजदूत की घोषणा अभी तक नहीं की है।

यह बात भी दुनिया के सामने है कि कोरोना विस्फोट के तत्काल बाद यानि अप्रैल 2019 से ही लद्दाख बॉर्डर पर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। इसका मुख्य कारण चीन द्वारा भारत के भीतर घुसपेठ करने की खबरों के अलावा चीनी सेना का देश के उत्तर लद्दाख की सीमा पर भारी जमावड़ा होना रहा। जून 2020 में यह विरोध हिंसक हो गया था, जिसमें दोनों पक्ष के सैनिकों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद दोंनों देशों ने बॉर्डर पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है। कई राउंड की टॉप सैन्य स्तर की बातचीत के बाद भी दोनों देश किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके हैं। इसलिये साफ तौर से समझ आ रहा है कि दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर बातचीत शुरू करने का दवाब देश के भीतर के अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर से भी मिल रहा है।

भारत से चीन को मछलियां, मसाले जैसे खाद्य वस्तुओं से लेकर लौह अयस्क, ग्रेनाइट स्टोन और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात होता है। लेकिन, उत्पादन में लागत में कमी कारण भारतीय व्यापारी पूर्व पश्चिम व यूरोप देशों के महंगे बाजार के बजाय चीनी के सस्ते बाजार से मुनाफा ज्यादा होने की वजह से चीन के उत्पादनों को तरहीज देतें हैं। कोरोना के अलावा उद्योग व्यापार के क्षेत्र में भारी आर्थिक नुक्सान दोनों देशों को हुआ है और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में गिरावट भी दर्ज हुई है।

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