HomeLifestyleहेल्थविश्व हेपेटाइटिस दिवस : हेपेटाइटिस आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को...

विश्व हेपेटाइटिस दिवस : हेपेटाइटिस आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है, जानिए

नई दिल्ली। हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है जो लीवर को प्रभावित करती है और बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। आइये आज विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर जानें कि हेपेटाइटिस आपके शरीर के लिए क्या कर सकता है।

हेपेटाइटिस एक गंभीर स्थिति है जो लीवर में सूजन के रूप में प्रकट होती है। यह एक वायरल संक्रमण है जो दवाओं और शराब के अत्यधिक उपयोग से भी शुरू होता है।

लीवर में सूजन के कारण आपका शरीर प्रभावित हो सकता है, और यह आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा। क्योंकि लीवर विभिन्न महत्वपूर्ण कार्य करता है। पित्त उत्पादन, पाचन से लेकर ऊर्जा प्रदान करने के लिए पोषक तत्वों के टूटने तक, आपके पूरे शरीर पर लीवर का प्रभाव पड़ता है।

हेपेटाइटिस को समझना
हेपेटाइटिस एक वायरल संक्रमण है जो लीवर को प्रभावित करता है और जिसे इसके विभिन्न रूपों, जैसे ए, बी, सी, डी, और ई में विभाजित किया गया है।

हेपेटाइटिस A : यह संक्रमित व्यक्ति के मल के संपर्क में आने से फैलता है, आमतौर पर सूक्ष्म मात्रा में। यह संपर्क आमतौर पर सामान्य वस्तुओं और भोजन के माध्यम से होता है।

हेपेटाइटिस B और C : यह आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति के रक्त, वीर्य या शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है।

हेपेटाइटिस D : यह लीवर की एक गंभीर बीमारी है, और संक्रमित व्यक्ति के रक्त के सीधे संपर्क में आने से फैलती है।

हेपेटाइटिस E : यह एक जलजनित रोग है, जो मुख्य रूप से खराब स्वच्छता और दूषित पानी के कारण होता है जो पीड़ित के पाचन तंत्र में मल पदार्थ को निगल जाता है।

-हेपेटाइटिस के सामान्य लक्षणों में थकान, फ्लू, गहरे रंग का पेशाब, पीला मल और पेट में दर्द शामिल हैं।

-एक व्यक्ति को भूख में कमी, कमजोरी, तेजी से वजन कम होना और त्वचा और आंखों का पीलापन भी अनुभव हो सकता है।

हेपेटाइटिस आपके शरीर को कैसे प्रभावित कर सकता है

चूंकि यह रोग आपके लीवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए आपका शरीर निम्नलिखित प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं के लिए अतिसंवेदनशील हो सकता है।

सोने में परेशानी : आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली ओवरड्राइव मोड में जा सकती है, और थायरॉयड ग्रंथि पर हमला कर सकती है। इसके परिणामस्वरूप कमजोरी, थकान होती है और अधिकांश दिनों में सोने में परेशानी होती है।

विषाक्त रक्त : चूंकि हेपेटाइटिस के कारण लीवर का कार्य खराब हो जाता है, रक्त से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने की शरीर की क्षमता प्रभावित होगी। यह कुछ मामलों में एनीमिया का कारण भी बन सकता है।

त्वचा और आंखों का पीला रंग : लीवर के खराब होने से भी पीलिया हो सकता है, जिससे त्वचा और आंखें पीली हो जाती हैं। यह शरीर में बिलीरुबिन के उच्च स्तर के कारण होता है।

मानसिक क्षमताओं की हानि : कुछ गंभीर मामलों में, मस्तिष्क में विषाक्त पदार्थों का निर्माण हो सकता है। यह भ्रम, का कारण बन सकता है।

पित्त उत्पादन में बाधा आ सकती है :  लीवर की सूजन आंतों की पित्त का उत्पादन करने की क्षमता को बाधित करती है। आपके द्वारा खाए जाने वाले भोजन से खनिज, विटामिन और प्रोटीन को अवशोषित करने के लिए पित्त महत्वपूर्ण है।

हेपेटाइटिस का निदान क्या है?
लक्षणों को ध्यान में रखते हुए और स्थिति की गम्भीरता के आधार पर डॉक्टर्स हेपेटाइटिस का निदान करते हैं। इन टेस्ट को करने की सलाह दी जाती है-

-पेट का अल्ट्रासाउन्ड

-लीवर फंक्शन टेस्ट

-ऑटोइम्यून ब्लड मार्कर टेस्ट

-लीवर बायोपसी

हेपेटाइटिस का उपचार क्या है ?

अक्यूट हेपेटाइटिस कुछ हफ्ते में कम होने लगते हैं और मरीज़ को आराम मिलने लगता है। जबकि, क्रोनिक हेपेटाइटिस के लिए दवाई लेने की ज़रूरत होती है। लीवर खराब हो जाने पर लीवर ट्रांसप्लैनटेशन भी एक विकल्प है।

हेपेटाइटिस में डायट कैसी होनी चाहिए?
हेल्दी डायट की मदद से हेपेटाइटिस की समस्या को मैनेज करना आसान हो जाता है। हालांकि, स्थिति की गम्भीरता और लीवर की सूजन के आधार पर डायट निर्धारित की जाती है। साथ ही डायट से जुड़ी इन बातों का ध्यान रखने से भी मदद होती है।

-अपनी डायट में फूलगोभी, ब्रोकोली, बीन्स, सेब, एवाकाडो का समावेश करें।

-प्याज़ और लहसुन जैसे पारम्परिक मसालों को अपने भोजन में शामिल करें।

-खूब पानी पीएं, ताज़े फलों का जूस पीएं।

-अल्कोहल का सेवन कम करें, गेंहू का सेवन कम करें।

-जंक फूड, मैदे से बने फूड्स, प्रोसेस्ड फूड और मीठी चीज़ों के सेवन से बचें।

-भोजन को चबा-चबाकर खाएं। इससे, भोजन पचने में आसानी होगी।

-एक साथ भारी भोजन करने की बजाय कम मात्रा में 4-6 बार भोजन करें।

हेपेटाइटिस से बचाव क्या हैं?
हेपेटाइटिस बी और सी की रोकथाम वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के प्रयास करने से हो सकता है। इसके अलावा बच्चों को हेपेटाइटिस से सुरक्षित रखने के लिए लिए वैक्सीन्स दी जा सकती हैं।

सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन के अनुसार 18 साल के उम्र तक और उससे वयस्क लोगों को 6-12 महीने में 3 डोज़ दी जानी चाहिए। इस तरह उन्हें, हेपेटाइटिस से पूर्ण सुरक्षा मिलेगी। साथ ही

इन बातों का ख्याल रखें
-अपना रेजर, टूथब्रश और सूई को किसी से शेयर न करें, इससे इन्फेक्शन का खतरा कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

-टैटू करवाते समय सुरक्षित उपकरणों का इस्तेमाल सुनिश्चित करें ।

-कान में छेद करते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि उपकरण सुरक्षित और इंफेक्शन-फ्री हैं।

-सेफ सेक्स

ये है इतिहास
दरअसल नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. बारूक ब्लमबर्ग का जन्म 28 जुलाई को हुआ था। उन्होंने सबसे पहले हेपेटाइटिस बी वायरस (एचबीवी) की खोज की। इसके बाद उन्होंने इस वायरस का उपचार और टीका भी विकसित किया। जिस वजह से उनकी जयंती पर विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments