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कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य की विधायक बेटे संजीव के साथ घर वापसी, कांग्रेस उत्साहित

नई दिल्ली। उत्तराखण्ड में विधान सभा चुनाव 2022 से पहले कांग्रेस ने भी भाजपा खेमे में सेंध लगाने में कामयाबी हासिल की है। कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य और उनके विधायक बेटे संजीव आर्य ने सोमवार को घर वापसी कर ली। इसके बाद कांग्रेस खेमा बेहद उत्साहित है और उत्तराखण्ड में पार्टी कार्यालय में जश्न भी मनाया गया।

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह, कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की उपस्थिति में यशपाल और संजीव ने कांग्रेस की सदस्यता ली। इसके बाद सभी की राहुल गांधी से भी मुलाकात हुई। यशपाल ने राहुल गांधी को पौधा भेंट किया।

देखा जाए तो हरीश रावत की बीते दिनों दलित मुख्यमंत्री उम्मीदवार की घोषणा के बाद से तरह तरह की अटकलें लगायी जा रही थी। हरदा के बात के कई मायने निकाले जा रहे थे। आज यशपाल आर्य की घर वापसी को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

खास बात है कि पिछले महीने ही उत्तराखण्ड के सियासी गलियारे में यशपाल आर्य के नाराज होने की काफी चर्चाएं थी। इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके घर जाकर मुलाकात भी की। तब यशपाल आर्य ने स्वयं मीडिया ने अपनी नाराजगी की खबरों को काल्पनिक और मनगढ़ंत बताया था। आर्य ने यहां तक कहा था कि उनकी खामोशी को किसी नाराजी से जोड़ना गलत होगा। हालांकि आज कांग्रेस में उनकी घर वापसी के बाद स्थिति पूरी तरह साफ हो गइ।

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यशपाल आर्य बाजपुर और उनके बेटे संजीव आर्य नैनीताल विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। यशपाल आर्य के पास परिवहन, समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, छात्र कल्याण, निर्वाचन और आबकारी विभाग थे। पिता पुत्र दोनों ने 2017 में कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा था। तब भाजपा ने दोनों को उम्मीदवार भी बनाया था। दोनों ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद भाजपा सरकार ने यशपाल आर्य को कैबिनेट मंत्री बनाया। अब 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। अहम बात है कि पिता-पुत्र के कांग्रेस में शामिल होने की भाजपा खेमे को भनक तक नहीं लगी।

वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यशपाल आर्य के कांग्रेस में शामिल होने पर कहा कि भाजपा में देश पहले और पार्टी दूसरे स्थान पर है। जबकि व्यक्तिगत हित अंतिम स्थान पर है। धामी ने कहा कि वह समझते हैं कि यशपाल आर्य का व्यक्तिगत हित आगे आ गया था।

उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव से पहले देवभूमि की सियासत में एक पाले से दूसरे पाले में जाने का सिलसिला जारी है। भाजपा बीते दो महीनें में तीन विधायकों को पार्टी में शामिल करा चुकी है। इनमें धनौल्टी से निर्दलीय विधायक प्रीतम पंवार, पुरोला से कांग्रेस के राजकुमार और भीमताल सीट से निर्दलीय विधायक राम सिंह कैड़ा हैं।

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