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विधानसभा में योगी बोले-पहले ऊंट के मुंह में जीरा होता था बजट, अब हुआ दोगुना

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को विधानसभा में अनुपरक बजट पर चर्चा के दौरान इसके अहम विषयों से सदन को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि 24 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में ढाई लाख का बजट ऊंट के मुंह में जीरा साबित होता था। यही कारण था कि राज्य अर्थव्यवस्था में पिछड़ा हुआ था। लेकिन, अब उत्तर प्रदेश निवेश के लिए सबसे अच्छे प्रदेशों में शामिल है। बजट पिछले पांच साल में दोगुना हो गया है।

पिछले पांच वर्ष के दौरान प्रदेश में बजट का दायरा लगभग दोगुना हुआ। आज हम लगभग 6 लाख करोड़ रुपये तक बजट के दायरे को पहुंचाने में सफल रहे हैं। बड़ी सोच, बड़े कार्य तो बजट का दायरा भी बड़ा होगा। प्रदेश की जीएसडीपी पांच वर्ष पहले 10-11 लाख करोड़ के आस पास थी, आज हम इसे 20-21 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने में सफल हुए हैं। उन्होंने कहा कि 2015-16 में उत्तर प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था में छठवें स्थान पर था, वहीं उत्तर प्रदेश आज नम्बर दो की अर्थव्यवस्था बनी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहली महामारी है जिसमें एक भी गरीब भूखा नहीं मरा। हमें महामारी को तो स्वीकार करना होगा नहीं तो बीमारी के उपचार के लिए और बीमारी से बचाव के लिए कोई अभियान आगे नहीं बढ़ पाएगा। उन्होंने कहा कि व्यवसाय की सुगमता क्या होनी चाहिए इस पर हमने व्यापक संशोधन किए, नीतियां बनाई जिसके परिणाम सामने हैं। अगर दुनिया में भारत निवेश का सबसे अच्छा देश है, तो देश में उत्तर प्रदेश सबसे अच्छा गंतव्य है। इज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तर प्रदेश 16वें स्थान से दूसरे स्थान पर आया है।

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विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी योगी आदित्यनाथ सरकार ने मानसून सत्र के दूसरे दिन बुधवार को 7301.52 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया है। सत्ता पक्ष इसे आम जनता के हितों वाला बजट बता रहा है, वहीं विपक्ष इसकी कड़ी आलोचना कर रहा है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि यूपी विधानसभा में पेश अनुपूरक बजट राज्य की विभिन्न संकटों में घिरी गरीब व मेहनतकश जनता के लिए उम्मीदों का कम व दिल दुखाने वाला ज्यादा है। अगर यूपी सरकार, तमिलनाडु की तरह, पेट्रोल की कीमत 3 रुपये कम कर देती तो करोड़ों जनता को महंगाई से थोड़ी राहत जरूर मिल जाती। उन्होंने कहा कि वैसे भाजपा सरकार ने जिस प्रकार से अंधाधुंध वादे व घोषणायें आदि किए हैं उसके अनुसार बजट का सही प्रबंध नहीं होने से वे कागजी घोषणायें ही बनकर रह जाएंगी जबकि बीएसपी सरकार में घोषणाओं से पहले उसके लिए वित्तीय व्यवस्था जरूरी था। यही असली फर्क है बीएसपी व अन्य में।

वहीं समाजवादी पार्टी ने तंज करते हुए कहा कि अधूरे काम वाली सरकार का पूरा होता कार्यकाल, जो पूर्ण बजट में कुछ ना दे सके। उनसे अनुपूरक बजट में कैसे मिले विकास के लिए अनुदान! विकास विरोधी भाजपा सरकार के दिन है बचे चार। “संकल्प पत्र” के हर अधूरे वादे का 2022 में जनता देगी वोट से जवाब।

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